प्रेम कान्ता सन्तति भाग 1 | Prem Kanta Santati Part 1

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Book Image : प्रेम कान्ता सन्तति भाग 1 - Prem Kanta Santati Part 1
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्रोहरि: | श्रीद्ट देवता चरण कमले स्योनम: ।. प्रेमकान्ता सन्तति ।या( हीरे का तिलस्म )एहिला हिस्सा ।काना नाउरटन्िनाााांपहिला बयान ।नएफरेक्रब्किशााण“'आगए शिर पर वढ़ी, जिसकी बहुत झांका रही | _ आागए जोड़ी नई, आफ़त खड़ा इससे भयी”” ॥।के . पलट 2 ला काया अा न्फूँ है. वाक्य है सा ःक तरह पर संध्या बीती; रजनी ने अपना आधिपत्य जमाया । ,उजाले का परदा हटाकर अन्धःकारने संसार को छिपाया घर: घर में राशनी जग मगा उठी;-कम- लिनीकी बढ़ी हुई शेखी टूटी;:--प्रसिपर की ड नियो' की बिरह वेदना छूटी। तारे बिखर- कर चमकने लगे; नवयौवना के मुखड़े द्मकन लगे । हवा




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