बृहत् कल्प सूत्र भाग 1 | Brihat Kalpa Sutra Part -1

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Brihat Kalpa Sutra Part -1 by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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॥ जरदेम्‌ ॥ फ़राः के (७ (जि नेकेठ गर्सागिक लिकेटस । दादाजी ग्रन्धप्रकादान--प्रस्ठुत अतिमान्य छेद्सूघ्ना एटले के नियुक्ति लघुभाप्य अने बृत्तिसहित चूहत्कल्पसूत्रना सम्पादनने लगतुं कार्य विक्रम संवन, १९८४ मां पूज्यपाद शान्त मददात्मा प्रज्ञांग श्री १००८ श्री हर्पमुनिजी मद्दाराजना ज्ञानप्रिय साहियारसिक शिप्य मद्दाराज श्रीमाणेकमुनिजीए आरंभ्युं हतुं । परन्तु केंटलां एक कारणोने छीये अमे तेओश्रीने प्रस्तुत श्रन्धरल्नना सम्पादननुं काम अटकावचा कं । छेवटे तेओश्रीर अमारी सूचनाने मान्य राखी ठगभग एक हजार श्टोक जेटढा छपायेठा भागने जतो करी तेजुं सम्पादन वन्ध कर्यु अने ते पछी अभे तरत ज एना सम्पादनने लगता कामनी दागआत करी । आजे जमे ए छेदयास्त्रना पीठिकारूप प्रथम विभागने विद्वानोना करकमल्मां समपण करवा भाग्यशाढी धया छीए अने क्रमे कमे वीजा भागों पण समर्पण करीडुं ए मुनिवर श्रीयुत माणेकमुनिजीना उत्साहपूर्ण साहसने ज आमभारी छे । अने ए ज कारणधी अमे अमारा “प्रासद्ञिक निवेदन ना आरम्भमां धन्यवादम्रदानपूर्वक तेमना नामनुं स्मरण करीए छीए | घृद्त्कल्पछुं प्रकादान अने जनससाजनी मान्यता--नन छेदयन्थों प्रकारामा आये ए सामे केटलाक आगेवान मनाता जन मुनिओनो थने तेमना अवाजनों पढ़घों पाठनार केंटलाक ग्ृह्दस्थोनों सख्त विरोध छे । ए विरोधमाटे तेमनी पासे कारणों मागवामां आये सारे तेओ एम जणाये छे के-“'छेदस्घोमां साधघुओना अंगत आचार जने प्रायश्रित्ने लगती केटलीये एवी गुप्त तेम ज गंभीर चावतों चर्चायेल छे, जेना आशयने चरावर न समजवाने लीघे भटद्रिक जीवों धर्मधी पराखुख थई जाय, तेम ज खास करी आज काठना नास्तिको एना उंधा थर्थ करी जन साधुसंस्थाने उतारी पाठइवा यल करे अने धर्मने चगोवे” । था दलीलने अभे थोड़ी चारने माटे प्रामाणिय तेम ज बजुददार सानी लईए; तेम छतां आज आ जातनी दलीलों आपनाराओमांना फेटलाक मुनिमद्याशयों छेट्सून्ोमां आवती अत्यन्त आपवादिक चायतोनो,-फे जनों उपयोग विशिष्ट इच्य क्षेत्र काल भावमां तेम ज सवास व्यक्तिमाटे अने ते पण फचिन ज फगवानों होय छे तेनो,-ररेक ठेकाणे एकसरस्त्री रीते उपयोग करवामाटे लनता आगछ हिमायत करी छेदसूघ्रकार सान्य स्थविर आचार्यवरोनी दीसेदर्धिता अने प्रामाणि- फताना मूछमां भयक्ूर छुठाराघान करे छे, तेम से जे दोपोनो आरोप पोते पोतानी कल्प- नाथी मानी लीथल नास्तिकों उपर करें छे तेनाथी पण भवद्वर रीते छेदसबोसांनी गर्मीर चातोने पोते समजया छतां आंग्यमीचामणां करी लेस आये सेस फटी नाग्ययानी धष्टना थे कल




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