स्वसमरानन्द | Swasamaranand
श्रेणी : जैन धर्म / Jain Dharm, धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2.58 MB
कुल पष्ठ :
90
श्रेणी :
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No Information available about ब्रह्मचारी शीतल प्रसाद - Brahmachari Shital Prasad
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(९) स्वसपरानन्द ॥
नलत्थानमें स्नान तो कया एक डुबकी मात्र ठइरानकों न करने
देनेवाले यह पांच आत्म मैरी हैं । पांचोंमें प्रघान सिथपात्व
सेनापति है, नौर अन्य चार अनन्ता छुबन्धी कोध, मान, माया,
कोभ, उस प्रधानके अनुगःमी मित्र हैं । इन पांच अफपरोंके
गाधीन कमेवगंणा नामके अनगिनती योद्धा युद्धके सम्मुख हो
रहे हैं । और अपने तीक्षण उद्यरूप ब।णों को छगातार उस वीर
जात्माकि विज्युद्ध परिणामरूपी छुमटोपर छोड़ रहे हैं पर्ठु वे
छुभर त्तत्वविचारकी अत्यंत कठिन ढाउसे उन बाणोंकी
चोटोंसे बिलकुछ बच नाते हैं । और यह सुभट भपने. वाणोंको
इस 'वतुरताते चलाते हैं कि उन पांचों सेनाके सिपाहियोंकी
स्थिति कम होती जाती है, तथा उनका रस भी मंद पढ़ता भाता
है | केवरु इन पांच सेनाओंदीका बल क्षीण नहीं हो रहा है,
किन्तु सबे विपक्षियोंकी सेनाकी कुटिलता और स्थिरता निमेठ
होती नाती है |
,.... एक मध्य अन्तमुहतंतक युव्ध करके इस वीरने अपना बहु
तह काम बना लिया है । मच इसके विशुद्ध भावोंकी सेनामें
सपूर्व ही नोश, उत्साह जौर साहस है । सत्य दे इत समय
इसके योद्ाओोंने अपूचव्दरणलब्थिका बल पाया है | अब
ऐसी भपूवेता इसके विशुर् परिणामोंमें है कि इसके नीचेफे सम-
यका कोई अन्य आत्मा किसी भी उपायसे इसके परिणामोंकी
बराबरी नहीं कर सक्ता है, जब कि ऐसी बात इससे पहले अधो-
करणमें सम्भव थी । भव समय ९ भपूर्व २. अनंतगुणी विशु-
द्ूताकी दृद्धिको घरनेवाले झुभट अपने वार्णोंको, तलवारोंको
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