आचार्य राजशेखरकृत काव्य मीमांसा का आलोचनात्मक अध्ययन | Aachrya Rajshekhar Krit Kavya Mimansa Ka Aalochanatmak Adhyayan

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
शेयर जरूर करें
Aachrya Rajshekhar Krit Kavya Mimansa Ka Aalochanatmak Adhyayan by आचार्य राजशेखर - Acharya Rajasekhara
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 25.94 MB
कुल पृष्ठ : 339
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है | श्रेणी सुझाएँ


यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटी है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं |

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

आचार्य राजशेखर - Acharya Rajasekhara

आचार्य राजशेखर - Acharya Rajasekhara के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश (देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
8] महेन्द्रपाल के समय के अभिलेखो की तिथियाँ उसके राज्याभिषेक के दूसरे वर्ष से उन्नीसवे वर्ष तक की है । महेन्द्रपाल का प्रशस्तिपरक सबसे पहला काठियावाड का ऊणा अभिलेख 574 वलभि स० + 893 ई० का है अत उसने 882 और 893 ई० के बीच कभी गद्दी धारण की होगी । परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर श्री महेन्द्रपालदेव के समय का ऊणा का द्वितीय अभिलेख 956 वि० स० - 899 ई० का है 2 महेन्द्रपाल की राजधानी कान्यकुब्ज नगरी थी । आचार्य राजशेखर ने बालभारत की रचना महोदय मे की थी । महोदय कान्यकुब्ज का ही दूसरा नाम था तथा महेन्द्रपाल तथा उसका पुत्र महीपाल सियादोनी शिलालेख मे कान्यकुब्ज से ही सम्बद्ध है । महेन्द्रपाल का प्रशस्तिपरक सिंयादोनी शिलालेख झाँसी जिले के सियादोनी ग्राम मे है जिस पर 903-907 ई० अकित है ।2 सियादोनी अभिलेख मे विभिन्‍न राजाओ की तिथियो का उल्लेख है। (1) भोज -- # 0 862 876 80 882 (2) महेन्द्रपाल -- 903-907 राजशेखर के शिष्य (3) उनके पुत्र क्षितिपाल अथवा महीपाल अथवा हेरम्बपाल / 0 917 1. एपिग्राफिका इण्डिका जिल्द 9 पृष्ठ-6 (पादटिप्पणी ) एपिग्राफिका इण्डिका जिल्द-9 पृष्ठ-4 (क) एपिग्राफिका इण्डिका जिल्द-1 806 - 173 (ख ) ८5 ०060 00 0४ रिड516। 800 निधि 16 8द00घाघ8 #85 6060 ॥1 फतदाा1008/8 आए 1/वा1008४8व 15 घा हा 1816 ए 0वा1एवाए10]8 (छि2 28४8) ( 87-89 न 9 306 6 15]) १) पट 0५ दा) हा10ा189] व घााएं हा वोघ ा& 000160160 | ह16 ऊा890०ा 50100 0 वदघाहापाघु 88 १४6 8५४७ 16 08065 903-4 10 907-8 निभुडी। 60815 (वा ए0ााघा]&1 में निघ|516101821 5 ९ 806 - 177 ( (0710४ तथा (७ नि ।छापााछा)




  • User Reviews

    अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

    अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
    आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :