कहानी : नई पुरानी | Kahani Nayi Purani

[adinserter block="2"]
Add Infomation About. Dr Raghuveer Singh
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
11.82 MB
कुल पष्ठ :
196
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about डॉ. रघुवीर सिंह - Dr Raghuveer Singh
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१४. सीवर-बाला आकर खड़ी हो गई । बोली-- मुकके किसने पुकारा ? मैंने । क्या कहकर पुकारा ? सुन्दरी । क्यों सुकमें क्या सौन्दर्य है ? और है भी कुछ तो कया तुमसे विशेष ? हाँ आज तक मैं किसी को सुन्दरों कदकर नहीं पुकार सका था । क्योंकि यह सौन्द्य-विवेचना मुझमें झब तक नहीं थी । - झाज श्रकस्मात् यदद सौन्दर्य-विवेक तुम्हारे हृदय में कहाँ से आया ? तुम्हें देखकर मेरी सोई हुई सौन्दर्य-तृष्णा जाग गई । श्रत्यघिक भावुकतामय श्र कवित्वपूर्ण कथोपकथन कहानियों के स्वाभाविक प्रवाह मे बाघक ही बन जाते हैं । देश काल तथा वातावरण उपन्यास में तो इन तीनों बातों का समावेश होता ही है श्रौर कहानी में ये श्राए बिना रह नही सकती | घटना तथा पात्रों से सम्बन्धित स्थान काल तथा उपयुक्त वातावरण की एष्ठ-भरूमि कथाकार को ही प्रस्तुत करनी पड़ती है किन्तु उपन्यास की अपेक्षा वह बहुत ही संद्तेप में श्र वस्तु-विन्यास से सम्बद्ध श्रत्यावश्यक क्षेत्र तक ही सीमित रहती है । देश काल तथा वातावरण का यह चित्रण बहुत स्वाभाविक श्ाक्षेक श्र यथासम्भव पात्रों की परिस्थिति के श्रनुकूल होना चाहिए । ऐतिहासिक ही नहीं किसी स्थान- विशेष को लेकर लिखी गई कहानियों में उस काल या स्थान को लेकर किये गए. वनों या घटना-क्रम को प्रस्तुत करते हुए उस काल या स्थान-विशेष की विशेषताश्रो की पूरी जानकारी श्रावश्यक है एवं उनका पूरा-पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए वरना कई एक बहुत ही मद्दी भूले हो जानी श्रसंभव नही । प्रेमचन्द जी की विश्वास कहानी को ही ले लीजिए ( मानसरोंवर . भाग
User Reviews
No Reviews | Add Yours...