चीनी यात्री सुंगयुन का यात्रा - विवरण | Chini Yatri Sungyun Ka Yatra Vivran

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Chini Yatri Sungyun Ka Yatra Vivran by जगन्मोहन वर्मा - Jagnmohan Varma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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है जद जे पडा था | वद्दा वदद लोगा को अन्न देने के लिये नियुक्त हुश्ना । चद्द बडा दी दयालु था । चहीं अफाल पीड़िता फी सेवा करते टुए उसने देदलाग किया । चीनी उसे चिघ्ानेवाला वोधिसत्व कईत हैं | इससे प्रपना नाम सघवर्स्मा रस्या था 1 ०६---वान-्युन--चीन से समुद्र देकर कलिंग श्ाया श्र घहीं रदता रा परलाक सिधारा 1 रऊ--ई-टुई--लोयाग में रददता था । यदद भारतवर्ष में वौद् घर्म की पुस्तका की खोज में श्राया श्रौर अनेक्र प्रथा को प्रति- लिपि करके लीट गया ८-+वीन चीनी उद्यान जाने के लिये नेपाल की राइ से श्राए श्र उद्यान में पट कर परलोफ फो सिधारे | २६--हुइछुन--यद्द कोरिया का रदनेवाला था । यद भारतवर्प में श्राया था शरीर गंगा के किनारे दस वर्ष रद कर नससे अपना नाम प्रतावग रखा था । ईसिंग ने लिसा है कि यद्द गया घी किनारे फे देश से उत्तर ्रार चला थार तुपार चैत्य पर पहुँचा । यदद तुपार चैत्य देशवासिया ने वद्दा फे श्रमणों के लिये बनवाया है । चैत्य के पश्चिम फपिश चैत्य है। श्रमण दीनयानानुयायी हैं । फपिश चैंस्य का शुणचरित वैत्य भी कदते हैं । समद्दायोधि के पर्व दो मजिल पर किउलू फिया नाम का एक विहार है । यद विद्दार द्तिय के एफ राजा ने बनयाया है । इस विद्यार के शरण घफिचन छाने पर भी विनय के नियमों का यधाये रूप से पालन फरने हैं । भमी घोड दिन हुए दक्तिय के




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