नागरी प्रचारिणी पत्रिका भाग 10 | Nagri Pracharini Patrika Bhag - 10

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Book Image : नागरी प्रचारिणी पत्रिका भाग 10  - Nagri Pracharini Patrika Bhag - 10
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about महामहोपाध्याय राय बहादुर पंडित गौरीशंकर हीराचन्द्र ओझा - Mahamahopadhyaya Rai Bahadur Pandit Gaurishankar Hirachand Ojha

Add Infomation AboutMahamahopadhyaya Rai Bahadur Pandit Gaurishankar Hirachand Ojha

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
_ श्रो जगझाथदास लाकर, बी० ए० ४८४एनननखुि े) धन )2 दर छडनि>छे भ्-नयर [वि बदन 5.4 पन्ने? ्) एन बडी नौ न एप दहन ही बद्रोड >। ननड जैज जी न प्रास्र( तमासे तरदीकाते दुनियावी मरा दूर कुनेद-एऐ राधा दाशमंद ाँकि झज़ उफतादने श्रकसे तन ऊ कि मिस्ले जाफूरानस्त, रंगे सियादे कान्द सरसब्ज मीशवद याने अज़ मुल्ाकाते ऊ कान्ह खुशवक्त मीशवद )( मेरे खब सासारिक दुःखे को दूर करो ए वद्दी चतुर राघा-- जिसके तन ( जा केसरिया रंग का है ) की छाया पढ़ने से कान्द जा श्याम रंग के हैं इरे-भरे दो जाते हैं भ्र्थात्‌ जिसके मेट दाने से कान्इ प्रसन्न दो जाते हैं )इस पुस्तक मे ६४० दोहे रखे गए हैं श्रौर दोहें। का पूर्वापर क्रम इसमे बिहारी के निज क्रम के अनुसार है । इसके क्रम तथा सख्या क॑ विषय मे बिहारी की निज क्रम की पुस्तकों के विवरण केश्रतगंत लिखा जा चुका है ।(४५३ )तिरपनवीं टीका बिह्दारी-रल्लाकर नाम की स्वय इस दीन लेखक की की हुई है । इसका प्रथम सस्करण नवल किशोर प्रेस लखनऊ मे छपकर पडित दुलारलालजी भार्गव द्वारा प्रकाशित हुआ है । इसके विषय मे कुछ विशेष वक्तव्य नटदीं है । इसमे दोष्टों के पूर्वापर क्रम तथा सख्या झनेक प्राचान हस्तलिखित प्रतियों के श्राघार पर चद्दी रखे गए हैं जा स्वय बिहारी के समभे गए । दोहों के पाठ भी इस में प्राचीन प्रतियें के सद्दारे यथासंभव शुद्ध किए गए हैं । इस संस्करण मे अलंकारादि का बखेढ़ा नहीं उठाया गया है । कवल दादी के यथार्थ भावों के स्पष्ट करने की चेष्टा की गई है। इसमें टीकाकार कहां तक सफल हुआ है यह विज्ञ पाठकों की भ्रनुमति पर निमंर है ।




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now