आपस्तम्ब - धर्मसूत्र | Apastamba Dharama Sutra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(१८)२. धर्मसूत्रों में कभी-कभी अपने चरण तथा अपने वेद के उद्धरण विशेषतः दिये गये हैं । ं३. प्राचीन घर्मसूत्रों के रचयितारओं को ऋषियों का ओहदा प्राप्त नहीं है भर न वे अपने को मानवीय धरातल से ऊपर उठे हुए अलौकिक चताते हैं, इसके विपरीत मनु और याज्ञवरुक्य जेसे रखतिकारों को मानव से ऊपर देवी दाक्ति से संपन्न दर्शाया गया है ।४. 'घ्मंसूत्र प्रायः गद्य में हैं या कहीं-कहीं मिश्रित राद्य और पद्य में हैं,- किन्तु स्टतियाँ श्कोकों में या पथदद्ध हैं ।५. भापा की दृष्टि से घमंसून्न स्खतियों के पहले के हैं, और स्उतियों की भाषा भपेक्षाकत भर्वाचीन है ।६. चिपयवस्तु के विन्यास की दृष्टि से सी उनमें मेद हैं । धर्मसूत्रों में चिपय की च्यवस्था, क्रम या तारतम्य का बजुसरण नहीं करती, किन्तु रसतियाँ अधिक व्यवस्थित भोर सुगठित हैं, उनमें विपयवस्तु सुख्यतः तीन छीर्पकों में सिभक्त हूँ--जाचार, व्यवहार और प्रायश्चित्त ।७. बहुत बद्ी संख्या में घर्मंसूत्र अधिकतस स्सतियों से प्राचीन हैं। .




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