पद्य रत्न माला | Padya Ratna Mala

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Add Infomation AboutMahamahopadhyaya Rai Bahadur Pandit Gaurishankar Hirachand Ojha
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4.18 MB
कुल पष्ठ :
206
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)जायसो प्
शआरेखि साँप, पेट महँँ पैसी । कादखि हुमुकि, जाति मु खसी ॥
भाट कहा--'धनि गोरा, तू भा रावन राव |
औति समंदटि वीधिके, तुस्य देत है पाँव ॥ ७ ॥
कददेसि अंत अब भा मुद्दे परना । अंत त खसे खेह सिर भरना ॥
कद्ठिके गरजि सिंघ अस धघावा । सरजा सारदूल पहँ श्ावा ॥
सरजे लीन्द सॉग पर घाऊ। परा खड़ग जन परा निद्दाऊ ॥
चज़ क साँग वद्ध के डॉडा | उठी आगि तस बाजा खाँड़ा ॥
मानहु वद्च बज़ सौं बाजा । सब दी कहा परी अब गाजा ॥
तस सारा दृठि गोरे, उठी बच्च कै श्रागि।
को नियरे नहिं छावै, सिंघ-सदूरदि लागि॥ ८ ॥|
सब सरजा कोपा चरिवंडा । जनहु सदूर केर भुजद्ण्डा ॥
कोपि गरजि सारेसि तस वाजा । जानहु टूटि परि सिर गाजा ॥
ठढॉठर टूट; फूट सिर तासू । स्थों सुमेर जन टूट झकासू ॥
घमकि उठा सब सरग पतारू । फिरि गई दोठि फिरा संसाख् ॥।
मइ परलय झस सब ही जाना । काढ़ा खड़ग सरग नियराना ॥
सस मारेसि स्थों घोड़े काटा । घरती फाटि सेस-फन फाटा ॥
गोरा परा खेत महैँ, सुर पहुँचावा पान।
चादल लेइगा राजा, लेइ चितउर नियरान ॥ ९ ॥|
नं -्रिषिथि- निशा
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