जीवन - मरण - रहस्य | Jivan Maran Rahasya

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Add Infomation AboutThakur Prasidh Narayan Singh
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2.74 MB
कुल पष्ठ :
98
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)शरीर की भीतरी क्रियाएँ और उनके उद्देश १७
शरीर के श्रत्येक भाग से निकम्मे झंशो को इकट्ठा कर लाती
है और फेफड़े, इ द्रियो और त्वचा के छिट्रो द्वारा मल-ख्प
मे निकाल देती है। आँख, कान, नाक 'और सुँह से भीतरी
सेल निकला करती है । वैसे ही पसीना और देह-बाष्प द्वारा भी
त्वचा के छ्विद्रो से मेल निकला करता है।
(३) श्वसन-क्रिया-इससे चादर की शुद्ध हवा भीतर
फेफड़ों सें जाती है । वहाँ अपने ऑक्सीजन को रूधिर के
हवाले कर देती है, श्मौर रुधिर के मल को छाप लेकर निःश्वास
द्वारा चाहर निकल आती है । हुवा का छॉक्सीजन रुधिर के
साथ सारे शरीर मे भ्रमण करता है, गौर जहाँ श्ञावश्यकता
दोती दैं, वहाँ काम से लग जाता है । इसी ऑक्सीजन के साथ
घ्धिकांश प्राण शरीर मे प्रदेश करता और संचालित होता
है। इसीसे श्वास द्वारा प्राणायाम करके योगी लोग झपने
शरीर में प्राण संचय करते हे | यही प्राण शरीर के प्रत्येक
'अंगो से शक्ति का. काम देता है । ड
(४) चेदन और कमे-संचालन-किया--यहद नाढ़ी-तंतुआओ
द्वारा होती है, जैसा कि ऊपर कह आए है। शरीर के भीतर
जितनी क्रियाएँ द्ोतो हैं, सबकी प्रेरक यद्दी क्रिया है। जसे
किसी कारखाने मे जाकर देखिए, जहाँ ए जिन द्वारा मशीनें
अर्थात् कलें 'चलती हो, तो वद्दों आप पावेंगे कि ए जिन से शक्ति
निकालकर 'झनेक यंत्रो में पहुँचाई जाती है, और उन यंत्रो से
झानेक काम हुआ करते हैं । वेसे ही इस वेदन और क्मं-
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