अतः कबीर शतक | Atha Kabir Shatk

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1.87 MB
कुल पष्ठ :
66
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)कर भाषा ठीका छू १७
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परें सब माझ भरे ॥ २४ ॥
मल
. कथितो गणवानेष, बिजया जय संग्रह ॥
ं ररररसानतीरटारपारतों २५
वद्दी ग़ुणबान जासो कददत गुणीलै छो
ग, वही योग भोग जासों कदत ककार है ।
वद्दीदे बिजय जग जुरे जैेतबारनि में, वही
पारजाय जाको नाम यो बकार हे ॥ वही र
रंकार राति दय्यौस ध्वनि लागी रहे, जागि
रहे ज्योति सोई दीसे बारपार है। ताददीते कह
तहैं कबीर तीन अंक जोरि,; मोरि २ की-
नो जग कानन कुहार है ॥ २५ ॥
मूठ
कण कमें निहोरी, बिहारी रति बद्धन ।
रविरये राजतेयो, यत्कवीर'सचोच्यत २६
दीका
.. कहीं निज कर्म तासो कटत बिकर्म
सब, तबडह्दे असैक गांवे केवठ ककार को 1
वन
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