सत्य संगीत | Satya Sangeet

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Satya Sangeet by दरबारीलाल - Darbarilal
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :2.13 MB
कुल पृष्ठ :142
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दरबारीलाल - Darbarilal

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कान ३ कक नशा बोलना कौन तू तेरा कौन निशान । किमाकार कया सीमा तेरी क्या तेग सामान ॥ कौन तू तेरा कौन निशान | अगम अगेचर महिमा तेरी कौन सके पहिचान । कणकणमे इबे तीथंकर ऋषि सुनि महिमावान || कौन तू तेग कौन निशान ॥ तेणा कण पाकर बनत हैं. जन सब्रज्ञ महान | पर क्या हो सकता है तेरी सीमाओं का ज्ञान ॥| कौन तू तेप कौन निणान ॥ नित्य निल्तर सूकष्म-अ्रवाही तेगा अदूभुत गान। होता रहता पर सुन पाते हैं किस किसके कान ॥| कोन तू तेश कौन निशान | दुनिया राती मैं भी रेता जब वनकर नादान । कितने हैं वे देख सके जो तब तेगी मुस़कान ॥ कौन तू तेग़ कौन निशान ॥ तू है वहीं चूर करता जो मेरे सब अभिमान । रोते समय ऑसुओकी धाराका करता पान. ॥ कौन दू ते कौन निशान ॥| इतना ही समझा हू स्वामी तेरा अकथ पुरान 1 इतने में ही पूर्ण हुए हैं मेरे सब अरमान... ॥ कौन त तेरा कौन निगान |




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