इतिसंग की भारत यात्रा | Itisang Ki Bharat Yatra

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Itisang Ki Bharat Yatra by पं संतराम जी - Pt. Santram Jee

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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है समीपर्ती देशों ८ थाना की थी और फई सुभर और शास्त्र सब मिलाकर दस पुस्तयों भेज रहा हूं। मुक्ते आशा है कि. पुम्यपाद भिक्षुमण जो अपने धम्मे-प्रचार में तत्पर हैं और जिनसें किसी ब्रकार का पक्षपात नहीं बुट् भगवान की दिक्षा तथा आचरण के सनुसार दिवेक-पुरबंक आतरण करेंगे और प्रत्थकर्ता को तुच्छ सम- भाने के कारण इस प्रस्थ में वर्णित सहस्वपुर्ण नियमों की उपेक्षा से करेंगे । मेंने उन्हीं धर्म्मतुष्ठानों का सोटा-मोटा चर्णन किया हूं जो कि बिनय-बाद से मिलते है भर आपके सम्मुख उन्हीं धाब्दों को रखा है जिनका आधार मेरे आचायों के प्रमाण है। यवि आप मेरे इस लेख को पढ़ेंगे तो एक सी पग अलने के बिना भाप भारत के समस्त पब्ीन्च- बैदेशों की यात्रा फर लेंगे और एक ही मितट देने पर आप भावी सहुसरों युगों के लिए तमोमय मार्ग का दर्पण वन जायेंगे। इस पुस्तक में चित सभी यातें आर्यमलतर्वास्तिनाद-निक्राय के अनुसार हैं इसलिए दुसरे निकायों की दिक्षा के साथ इन्हें गड़बड़ न कर देना चाहिए। इस ग्रन्थ के दिषय प्राय ददाध्याय के विनय से मिलते हैं। आायें लंसर्वास्तिवाद-निकाय के तीम उप-विभाग हू--१. पर्म्स- गुप्त र. महीशासक रे. शाइयपीय।




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