सामान्य भाषाविज्ञान | Samanya Basha Vigyan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
981.78 MB
कुल पष्ठ :
304
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(ड )शरीर अधिकतर विकल हो जाता है. जैसे भइ है, आदि (३४); वलाघात तथा
-भावातिरेक में भी प्रयत्नलाघव के कारण परिवर्तन (३५) बड़े व्दों को संक्षेप
रूप से व्यक्त करना आदि (३५) । प्रयत्नलाघव की दृष्टि से मन का आगे को
'ब्वनियों पर पहुँचना और विभिन्न ध्वनिविपर्ययों का भाषा में आगम--परस्पर
विनिमय (३६), ध्वनिलोप या अक्षरलोप (३६), समीकरण--पुरोगामी
तथा पश्चगामी (३७), विषमीकरण (३७) । अन्य प्रयत्त छाघव-जन्य परिवर्तन--
संयुक्ताक्षरों के वीच या पूर्व स्वरागम ( स्वरभक्ति और अग्रागम) (२८), एक ही
विचार के वाचक दो दाव्दों (३८) या दो वाक्य-विन्यासों का मिश्रण (३८) ; तथा
विदेशी शब्दों का स्वदेशी परिचित शब्दों से मिलता-जुलता उच्चारण (३९) ।सातवां अध्याय -'ध्वनि यंत्र पू० ४०-४४
ध्वनि यंत्र (४०) वास की विचित्र विकृति से ध्वनिसृघ्टि (४१)
तथा भोजननालिका (४१), स्वरयंत्र तथा स्वरतन्त्रियों की चार
विभिन्न स्थितियाँ (४१-४२) । ध्वनियंत्र के विभिन्न अवयव--मुखविवर आदि
(४२) अलिजिह्न की तीन विभिन्न अवस्थाएँ (४२-४३), जीभ की विविध
अवस्थाएं (४३-४४) । इस प्रकार स्यानभेद व प्रयत्नभेद से अनन्त ध्वनियों
की सृष्टि (४४) । ध्वनि का लक्षण (४४) तथा तीन अवस्थाएँ (४४); प्रो०
डेनियल जोन्स के मत से ध्वनि का लक्षण (४४-४५) । ध्वनिग्राम (४५) ।अठवां अध्याय--ध्वनियों का वर्गीकरश पू० ४६-४२
स्थान तथा प्रयत्न पर ध्वनियों का द्विधा वर्गीकरण (४६) । स्वर तथा
व्यंजन (४६) और उनके लक्षण--प्राचीन (४६) तया आधुनिक (४६-४७) ; स्वर
तथा व्यंजन का भेद (४७) । स्वरों का वर्गीकरण (क) जीभ के विभिन्न स्थानों
पर--अग्र, मध्य तथा परच स्थान (४८) तथा (ख) मुख के खुलने पर संवृत,
विवृत, अ॑संवृत तथा अर्धविवृत (४८-४९) । व्यंजनों का वर्गीकरण (क)
सघोष तथा अघोष (४९); (ख) द्वयोष्ठ, दन्त्योष्टूय, दन्त्य, वर्त्स्य, तालब्य,
मूर्घन्य, अलिजिह्लीय उपालिजिह्लीय तथा स्वरयंत्र-स्थानीय (४९-५०) (ग))
अयत्न-भेद से--स्पशश, संघर्षी, पाइ्विक, लोडित तथा उांत्क्षप्त (५०-५१),
(घ) अनुनासिक तथा अननुनासिक (५१) । य् और व् के दो रूप (५१)
अल्पप्राण और महाप्राण (५१-५२) । मुख्य तथा गौण स्थान (५२) ।1।
नवां अध्याय--ध्वनियों के गुण पृ० ५३-४६मात्रा, सुर और वलाघात (५३) । मात्रा के तीन प्रकार--ह्लस्व, दी्घ॑ तथा
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at 2020-07-10 20:38:21Pooja
at 2020-07-07 09:52:58