समग्र ग्राम सेवा की ओर | Samgra Gram Seva Ki Aur
श्रेणी : इतिहास / History

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
12 MB
कुल पष्ठ :
721
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( रद )
परियतन; कौन सभ्य दे ! 2
१७८ निरिचंत प्रयोग की चेश ... .-...... ,..१०७-१२०
[ आम-कार्य की योजना, समग्र दृष्टि की श्यावश्यकता;
रासना की विशेषताएं ; धुनाई-कताई श्रौर राश्रिपाठशाला; -
सूत न खरीदने की नीति की निष्फलता; स्ररियों का शिक्षण
शरीर सुधार ] हि
१८. रासना की रोप कथा. ... मर «रत है ०-१ ३रे
[ रासना पेन्द्र का श्रन्त 3
१३. सेवा का निश्चित कदम ..« वररन१र३
[स्वास्थ्य का दिवाला; गाँव में विश्राम का निश्चय;
रणीवाँ का चुनाव ]
२०. प्राम-प्रवेश का तरीका १२९६-१३ २
[ ब्याख्यानवाजों के सम्बन्ध में गाँववालों के विचार;
दमारे रददन-सदन की देख-रेख: दमारा तक; चर्खा चला;
गाँव में वद्दीं कते सूत की पदली साड़ी 3]
२१८ समग्र प्रामसेवा की भर नम १३९-१३७
[ रणीयाँ की चस्ती, बहुत पिछड़ा गाँव, दकियानूसी दिमाग
पर प्रेम श्रीर श्रद्दा से भरा इृदय; आमसेवा का श्राधार-विन्दु,
निराशा इमारें गलत दृष्टिकोण का परि्णिम, दस कितने
दुबल हैं! ]
र३, सफाई की योजना १ ३८-१४
ने दे, घनिषप्ट सम्पक का छाम कहे धप
[ घालोचुनाधों का श्रन्त, चिकित्सा फे सम्बन्ध में विचार
चेघ्न-विरतार थे
शुभ दरय र्दादछर्दग की अोर बध्दनशु
[बुनाई का धरम; शुभ परियाम, पक विधया म्ादाणी
पु साइस ये
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