साधना - पथ | Sadhna Path

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutShambhoodayal Saksena
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
136
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about शम्भूदयाल जी सक्सेना - Shambhoodayal Saksena
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)साघना-पथ ११चन्दाबाई-- क्या मे आपके सामने अनेक बार यह स्वीकारनहीं कर चुकी हूँ; कि इसका सारा दोप सेरे ही मत्थे है। में नहीं
जानती थी कि वोध मीरा इतनी भावुक है। बह हँसी की बात
पर एसा आचरण करने लगेगी; पत्थर के ठाकुर जी को अपना
स्वामी कहेगी ।रतनसी-- यही तो |चन्दाबाई-- मै अब पढताती हूँ; महाराज । उसका
भावावेश; उसकी भक्ति छोर उसकी तन्मयता देख कर कभी-
कभी मुके डर होने लगता है। इसी से कहती हूँ; महाराज
जल्दी कीजिये। ,रतनसी- में र्वय निश्चिन्त नही बेठा हूँ ।चन्दाबाई--- प्रमाण ? बिना प्रमाण मै केसे मारने ?रतनसी-- आज मालूम पड़ा कि अपनी बात पर विश्वास
कराने के लिये मुे तुस्हारे सामने भी प्रमाण की आात्रश्यकता
होगी ?चन्दाबाई-- महाराज मे माता हूँ और अबला भी। ,छन्त'पुरवासिनी होने के कारण हम लोगों का कार्येदोन्न बहुत ?
सीमित रहता है । पुरुषों का काये-दोत्र विशाल होता है; और
इसी से हम प्रमाणों-द्वारा इस बात का पता लयाना चाहती है
कि काये की व्यवस्था से हसारी प्रेरणा पढ़ी तो सही रह गई ।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...