लोक - रहस्य | Lok-rahasya

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Lok-rahasya by बंकिम चन्द्र - Bankim Chandra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बाबू हैं नल जन निकल अप नर नाथ न करनेसें यतुर: हॉंगे,बद्दी बादू कहलावेंगे । हे कुरुकुलभूषण, दिष्णु- के साथ इन वाबुओंकी बड़ी समानता होगी । ,शिंष्णुकी तरह इनके पार लक्ष्मी भर सरस्वती दोनों पढेंगीं, विष्णुके समान यह भी जनन्तशय्याशायी होंगे । ही समान इगफे भी दस अवतार होंगे जैसे--मुन्शी, मार्ट चत्दी, सुतसद्ी, डाक्टर, वकील, हाक्म, जमींदार, सम पक न्रिप्संपादक और निष्कर्मा । चिप्णुके समान सब जवताधख की. फरााक्रमफ साथ थह छोग अखुरोंका बघ करेंगे। से सती सवतारतों दुफ्तरीका, मास्ट्र- भवतारमें छात्रोंका, स्टेशनमास्ट्र-अवतारमें बिना टिकटके सुसाफिरोंका, द्यानन्दी-अवतारसैं भोजनभट्ट गुद-पुरोशितोंका, मुतसद्दी-अचतारस अंगरेज ब्यापार्यिंका, डाक्टय-अवतारीं रोगियोंका, घकील अवतार सुवक्किलोंका, दाक्िम-अवतारमं मुकदमा लड़नेवालॉका, जमींदारावचलार रेयंतोंका, सम्पा- दक्ावतारसें भठेमानलॉका जोर निष्कर्स्सघतारमें सब्खियोंका बघ होगा | महाराज ! भोर खुनिये । जिनका घखन मनमें एक शुभा, कहनेमें दस गुना, लिखनेंमें सो गुना, कगउेमें इजार गुना हो, चददीं बादू होंगे । जिनका बुर हायथमें पक गुना, मु हमें दसशुना, पीठ सौसुना भोर कामके समय छोप हो जाय, घद्दी' बाबू होंगे । जिंन- का सुस्तकोंमें, जवानी आानिपर धोकर, बृढ़ापेफे समय घरवादीकें अधिलमें रहे, यही बाधू होगे ।' जिनके




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