एक धर्मयुद्ध | Ek Dharm Yuddh

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काशिनाथ त्रिवेदी - Kashinath Trivedi

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महादेव हरिभाई देसाई - Mahadev Haribhai Desai

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तैयारी कर रहे हैं । इस पर गांधीजी अहमदाबाद आये । उन्हें पता म्वला कि किसी ग़लतफ़दमी के कारण कई मिलों के मजदूरों ने हड़ताल कर दी है । पंचों की चियुक्ति के वाद मजदूरों का यद काय गांधीजी को अयुचित माछम हुआ । जो कुछ हो चुकां था, उसके छिए उन्होंने मिलमालिकों के सामने अपना खेद प्रकट किया, और कही कि मजदूर अपनी ग़लती को दुश्स्त करने के लिए तेयार हैं । यहाँ यह कह देना करी है कि इस मामले में मिलमालिक बिलकुल वेकसूर तो नहीं थे; फिर भी गांधीजी ने अपने पक्ष के कसूर को ही वड़ा माना आर उसे सुधार लेने की तत्परता दिखाई । लेकिन यात मालिकों के गढे नस उतर सकी । वे इस दक़ीक़त पर ज़ोर देने लगे कि चूँकि पंच की नियुक्ति के वाद मज़दूरों ने हड़ताल कर दी दै, इसलिए, पंच-फ़ैसडे की वात अब ख़त्म हो जाती है । पंच के वंधन से वे अपने को मुक्त ७ समझते हैं, भीर जो. मज़दूर २० प्रतिशत मत्ता लेकर काम करने को तैयार नहदीं हैं, उन्हें निकाल देने का निश्चय कर चुके हैं । इस संकट को टालने के लिए गांधीजी ने अथक परिश्रम किया; लेकिन मिलमालिक मजदूरों की ग़लती पर ही फोर देते रहे, और खुद जरा भी रस से मस न हुए इसके बाद से गांधीजी मजदूरों में खूब हिलने-मिछने लगे । बे श्री अनसूचावइन, और श्री० शंकरढाल बैंकर के सिवा उम लोगों से भी मिलने और सलाह-मधविरा करने लगे, जो सिल- मजदूरों की हालत से वाकिफ़ थे और तनख्वादद दगेरा की जानकारी रखते थे । उन्होंने चढ़ी चारीकी से नीतचे लिखे सवालों की छानवीन घुरू की: अहमदाबाद के मजदूरों को कितनी मजदूरी मिलती है? धम्बई के मजदूरों को क्या मिलता है? मजदूरों की त्




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