ग्रंथालय मीमांसा | Granthalay Mimansa

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
12 MB
कुल पष्ठ :
81
श्रेणी :
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मुरारि लाल नागर - Murari Lal Naagar
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रा. रंगनाथन - Ra. Ranganathan
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हीह अन्थालय मीसांसा
हैद्वारा मी होता है। ये केन्द्र इसलिये होते हैं कि स्थान की दूरी अ्न्थों के
उन्सुक्त और एस उपयोग में बाघक न हो ।* उदाहरण के लिये; डबलिन
के द;२४,०५० जनससाज के लिये पाँच श्रान्तीय अ्रन्थालय हें । इसी श्रकार'
मितब्ययी होते हुए भी. ४,२०५०००. की जनसंख्या वाला एडिनबरा
अब तक ऐसे सात शाखा अन्धालय स्थापित कर चुका है। मेन्वेस्टर में७,४४५०५०० नागरिकों के उपयोग के लिए ऐसी तीस शाखायें आवश्यक० हू चन५ डे कप, कर
समसी गई । बॉसिंघम सें जहां 8,१४:००० लोग निवास करते हैं;
पच्चीस शाखा अन्थालय ग्रन्थों के अपेक्तित प्रसार के लिये पयाप्त न हूए ।
टोरंटो ने जिसमें केवल +,%०,००५० लोग रहते हैं अब तक ऐसी पंद्रह०. %, ७ दद 3, 2५ #५ ष क७ . शरश,
शाखाय तो खोल ही दी हैं ओर वह अभी अधिक खोलने के विचार में है ।
ऐसे ही क्लीवलेणड सें जिसकी जनसंख्या केवल प;००५००० हैं पच्चीस शाखाये
दौर १०० वितरण केन्द्र अन्थों का प्रसार-कार्य करते हैं और अन्त में
शिकागो की ४६ शाखायें और २७४ वितरण केन्द्र ३०;००५५०५० की
जनसंख्या के लिए बहुत ही झपयाप्त सिद्ध होते हैं ।यदि एक बार “'यन्थ उपयोगाथ हें” यह सूत्र स्थिर हो जाय शोरग्रन्थालय इस सिद्धान्त को अच्छी तरह समभकने लग जाएं कि उनकीसत्ता तभी सफल है जब कि उनके अन्थ भ्रधिक से अधिक पढ़ने वालों द्वारा
उपयोग में लाए जाय तो. अन्थालेय के स्थान के सम्बन्ध सें कोई मतभेद
रह जायगा । फिर कोई भी ऐसे स्थान को; जंसा कि उपर कंलेट-हॉंल के चत्ता
ने वणन किया था; घिचार में भी न लायेंगे । एक चतुर दूकानदार; जो
अपनी सामग्री को. बेचना चाहता है; श्रपनी दूकान मन्दिर की सश्चिधि
में रखता है । इसी प्रकार कॉफी-हाउस का सालिक यदि अपना व्यापार बढ़ाना
चाहता हे तो अपने 'पानयूद* को किसी बड़े छात्रावास के सामने जमाता हे ।
ऐसे ही जो पानवाला दिन भर की बिक्री में अधिक पंसे की इच्छा रखता दे
द अपना पट्टा किसी चलते दोट्ल की बगल में सजाता है। इसी प्रकार
उस अन्थालय को; जिसे श्रपने अन्थों के पूरे उपयोग करवाने की फिक्र हो
झपनी नींच अपने श्रत्थ-ग्राहकों के सध्य में राइनी चाहिये। दूसरी ओर
से देखें तो दम पायेंगे कि किसी लोकप्रिय मन्दिर की सब्चिधि दूकान से खाती
ल होगी शरीर इसी प्रकार सब बढ़े और शौकीन छात्राचासों पर प्रायः
पानयूद्द और पान की दूकानों का छुत्ता होगा । यही बात अन्थालंयों पर सी.... खागू होती हे । जहां कद्दीं लोग प्रायः जमा होते हों वही अन्थालय के लिये...
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