भारतीय राजस्व | Bhartiya Rajsv

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Bhartiya Rajsv by भगवानदास केला - Bhagwandas Kela
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :
95 MB
कुल पृष्ठ :
241
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ज्ञनिक ऋण--भारत पर कस्पनी के युद्धों का भार--कस्पनी के कारोबार हा भार--कस्पनी के. पुरष्कार का भार-सिपाही विद्रोह का भार--पब्ियामेन्ट का समय--ऋण का व्योरा-सूद का हिसाब--कांग्रेस का प्रस्ताव; देश भावी ऋण का उत्तरदाता नहीं--ऋण दूर किस प्रकार हो ? पृष्ठ १७३७-१६०ग्यारहवां परिच्छेद; साथिक स्वराज्य । _.... स्थानीय कार्यों की . विशेषता--स्थानीय और अन्य राजस्व में भेद-स्थानीय राजस्व का. आदर्श--स्थानीय स्वराज संस्थाओं और सरकार का. राजस्व--सम्बन्ध- स्थानीय करों का विवेचन - सारतवपष की स्थानीय स्वराज । -सस्यूनिसिपेलटियां और. कारपारेशन--कार्य--आमदनी के श्रोतल--सखरकारी सहायता--संख्यो अरगेर आय व्यय--आय व्यय की महू जन संख्या--कर की मात्रा--नोटीफाइड परिया-- बोडों का आय व्यय--पोर्ट दुष्ठ-स्थानीय राजस्व और खुधघोर योजना । टू पृष्ट १६०-२०८दसवां परिच्छेद, स्थानोय राजस्व । हमारी. आधिक परांघीनता--इस का परिणाम; आधिक ुदशा--भार्थिक स्वराज्य की आवश्यकतो--स्वराज्य और मा्थिक पृष्ट २०८-२१७४




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