काव्य - विमर्श | Kavya Vimarsh

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Kavya Vimarsh  by पं रामदहिन मिश्र - Pt. Ramdahin Mishra
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :
11 MB
कुल पृष्ठ :
328
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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काव्यालोर्क ] [ ६३ स्थान, काल आदि द्वारा व्यवहित हृदय के सहित हृदय का मिलना जिससे घटित होता है चह साहित्य है । आचाय॑ क्षि० सो० सेन४ साहित्य शब्दों की अँगूठी में विचार का नगीना है । कार्काइल४. साहित्य भव्य विचारों का लेखा है । एमसन६ प्रत्येक देश का साहित्य वहाँ की जनता की चित्तत्रत्ति का संचित प्रतिबिम्व होता है। आचाय रामचन्द्र शक्छइस प्रकार साहित्य के स्वरूप-निदेशक असेक व्याख्यात्मक, भावा- त्मक, विचारात्मक लक्षण हू जिनसे उसकी बाँकी काँकी सिलती है |तीसरी किरणसाहित्य का व्यापक श्रथ संस्कृत में साहित्य शब्द का व्यवहार अपेक्षाकृत आधुनिक है। क्योंकि प्राचीन अन्थों में इसका उल्लेख नहीं पाया जाता । पहले साहित्य शब्द का ऐसा अथ भी नहीं था जैसा कि आज समझा जाता है। किन्हीं दो वस्तुओं .के एक साथ होने का तात्पयं इससे ज्ञात होता था । किसी के साथ संग वा मेल करने को भी साहित्य कहा जाता




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