देश और उनके निवासी भाग 1 | Desh Aur Unke Nivasi Bhag-1

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Desh Aur Unke Nivasi Bhag-1 by सविता सिन्हा - Savita Sinha

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अध्याय दो ग्लोब और मानचित्र द्वारा ज्ञान + पारिभाषिक शब्द जो तुम जानते हो प्लोब --- पृथ्वी का एक प्रतिरूप माइल । मानचित्र -- पृथ्वी के धरातल या उसके किसी भाग _ का किसी चपटी सतह पर किसी पैमाने के अनुसार / प्रदर्शन । पिछले पाठ में तुम पृथ्वी का फोटो देख चुके हो । इसकी आकृति गोल है। पृथ्वी की आकृति कों दिखाने के लिए हम प्रायः इसके प्रतिरूप माडल ग्लोब का प्रयोग करते हैं । ग्लोब पर महाद्वीपों और महासागरों की आकृति और आकार बिल्कुल सही सही दिखाए जा सकते हैं । ग्लोब पर दूरियाँ और दिंशाएँ बिल्कुल सही होती हैं । कुछ समय पहले तक ग्लोब को लाने-ले जाने में परेशानी होती थी । लेकिन अब ऐसे ग्लोब भी बनाए गए हैं जिन्हें मोड़कर जेब में रखा जा सकता है । फिर भी ग्लोब पर स्थलाकृतियों सड़कों रेल मार्गों नगरें और गाँवों आदि को भलीभाँति नहीं दिखाया जा सकता है। अत हम चपटी सतह पर बने मानचित्रों का प्रयोग करते हैं । वे संपूर्ण धरातल या उसके एक भाग को किसी पैमाने के अनुसार प्रदर्शित करते हैं। किसी गोल आकृति को पूरी तरह से चपटा करना असंभव है । परिणामस्वरूप हमारी पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र अनुपात से अधिक फैल जाते हैं । फिर भी हमारे अनेक प्रयोजनों के लिए मानचित्र बहुत उपयोगी हैं । हम पूरे संसार या उसके एक भाग का मानचित्र बनाकर अपनी इच्छा- नुसार कई चीजें प्रदर्शित कर सकते हैं । इन प्रयोजनों के आधार पर मानचित्र कई प्रकार के होते हैं। देश और उनके राज्यों की सीमाएँ प्रदर्शित करने वाले मानचित्रों को राजनैतिक मानचित्र कहते हैं। कुछ मानचित्र पृथ्वी के भौतिक लक्षणों जैसे विभिन्न ऊंचाइयों की स्थलाकृतियों को प्रदर्शित करते हैं । इन स्थलाकृतियों में पर्वत पठार और मैदान नदियां महासागर आदि मुख्य हैं । प्रेसे मानचित्र प्राकृतिक मानचित्र कहलाते हैं । कुछ मानचित्रों में विभिन्न प्रकार के मौसम या वनों उद्योगों और जनसंख्या आदि का वित्तरण प्रदर्शित किया जाता है। अतः मानचित्र में जिस प्रकार की सूचनाएँ प्रदर्शित होती हैं उसके अनुरूप उसका शीर्षक रखा जाता है | इस प्रकार प्रत्येक मानचित्र कोई न कोई कहानी कहता है । लेकिन उस कहानी को हम तब तक नहीं समझ सकते जब तक कि हमें मानचित्र की भाषा का




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