वैदिक व्याकरण | Vedik Vyakaran
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
24.72 MB
कुल पष्ठ :
758
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)अनुवादकीयकप्टताटडतचाट पब्चस्य
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का ठीक-ठीक हिन्दी रूप ढ ढ़नेके लिए कितना प्रयास किया गया इसे स्थाली पुलाकन्यायेन एक उदाहरण से स्पष्ट
किया जा रहा है । मंकडानल ने अपने ध्याकरण में उप्रफिशंघज८ दाव्द का अनेक
स्थानों पर प्रयोग किया है । इसका “भाववाचवक कदन्त” अनुवाद पुज्य पिताजी को
जंचा नहीं । “वा आदि के भी भाववाचक क़दन्त होने के कारण अतिव्याप्ति होने७का डर था । 'तुमु कदन्त' में उन्हें अव्याप्ति का भय था वयोंकि वेद में केवल तुम
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