श्री जैन सिद्धांत बोल संग्रह | Shree Jain Sidhant Bol Sangrah

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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११ अआविकाश्म इस वर श्राधिकामम में वचन एक ही श्राविरा ने क्यिम्यस किया 1 उपहार चिमाग इस दिशाग की घोर से द० ११४ वी थी जैन निद्ान्त वीव दध्र शर स्क दी घ्न्य पुस्तं कल २० १६६॥४दी अददा प्ट 4 शास्त्र भण्डार (लायत्ररी) श्म षं दन्द, अगज भौ त्र मादि पिभिदर परियो की = एने १ चाचनालय 6 भिभाग में दनि सारादिक, पालिः मातिर श्रौ९ वरमामिरं पद पसिताएँ धरती दै! ग्रन्थ प्रकाशन विभागं इस बप इस विभाग में बीच लिखी पुन्ते छण स~~ (११ श्री जैन सिद्धान्त बल सगर प्रयम भाग [ (१) पच्चीम बोल का वोक्य (खनी प्रृत्ति) 1 दो शय समिनि तीन युधि का योक्त (मरी अत्ति) प्रिंटिंग प्रेस (सुद्रणातथ) इस पपे पुन प्रेस का काये नये रूप से घारम्म किया साया । एव नह त्रितत्ती री सगान जिसका किं सास सनापोल है ८०००} ठन मे भगवा गर । तमाति भौर मगननि का सर्वा अलय दहे! युध्य दी नय टाइए थी सग्दय गईं | दत समय प्रेस का कार्य वेनत सुन्दर ढंय से चन रहा दे 4 सस्था के चतैमान कार्य कत्तं १ श्री शम्पूुदमावना स्मेना माहित्यरन । ~ + मा निषलानकी सेनय! ३ ,, माणिक चदेक भाचार्य एस एं थी एल । ४ न लिवकाली सरकार एम ए 1 + , ज्योतिपचन्दी घोष एम ए वी एल । है... खुशालीराम नादया ए प्लपुन थी




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