श्री जैन सिध्दान्त बोल संग्रह - भाग 7 | Sri Jain Siddhant Bol Sangrah - Bhag- 7

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[18] बोल नं० पृष्ठ पांच पद क्‍यों कद्दे ! ष्ण ६५३ नमस्कार सूत्र में सिद्ध से पदले अरिहन्द को क्यों नमस्कार किया गया ९ ছল ६६१ नामकर्म की वयालीसख प्रकृतियां १४६. ६६४ (३) निम्नन्थ प्रवचन सहिसा गाथा ३ ५५५ प ध्णरे (६) परमावधि ज्ञानी क्या चर्म शरीरी होते है? १०३ ६६४ (१४) परिम का त्याग गाथा ११ १८१ ६६२ पुष्यप्रकरुतियां वयाद्धीस 1৬০ ६८३ (३९) पुष्य नक्षत्र की ्रष्टता का चणेन क्या जेन शास्त्रों में भी है? १२६ ६६४ (२०) पूजा प्रशंसा का त्याग गाथा १० १६० ६८७ पृथ्चीकाय (खरबाद्र) के चालीस भेद १४४ ६८३ (२७) पृथ्चीकाय के जीव क्ष्या १८ पाप का सेवन करते हैं ॥ १४२ ६६७ पंतालीख आगम २६० धीकज्ञनं० ` प्रष्ठ ६७६ पेंतीस बाणी के अतिशय ७१ ६६४ (३६) प्रसाद्‌ गाथा १० २३१ ६६४ प्रवचन संग्रह तयाल्ीख १४१ ६५३ प्रश्नोत्तर छत्तीस ( १००४ प्रायश्थित के पचास भेद २७१ ६६८ बन्तीस अस्वाध्याय २५ ६६६ वत्तीस सूत्र २९१ ६६० बयालीघ श्राहार दोष १४६ ६७३ बहुश्न्‌त्त पूजा अध्ययन एड० अ० ११) की चत्तीस गाथाएं ५१ १००७ बाबन अनाचीणे साधु के श्ष्र ६६७ ब्रह्मचयं की बत्तीस उपमा १५ ६९४ (१३) बह्यचये शील ग्राथा १६ १७७ ६६६ धाह्मीलिपि के सातुका- र छियालीख २६७ भ $০০ই भगो उनचास भावक प्रत्याख्यान के २६७ ६६४ (१६) अमरचृत्ति गाथा ४ १८४




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