लाल धरती | Laal Dharti

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Laal Dharti by कृष्ण चंदर - Krishna Chandar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ऐटमी सुल्तान ट्रमन के नाम श्रीसानु आप सचमुच श्रीमान्‌ हूँ क्योंकि दुलिया की सारी श्री बटोर-बटोर क्र आप अपने तहस्रानों में भरते जा रहे हूं यहाँ तक कि जब सारी दुनिया के आदमी भूखों मर रहे हें आप के सुअर गेहूँ खा खा कर मोटे हो रहे हैं मुझे यकीन है कि आप सुक्कको नहीं जानते लेकिन यों तो आप शायद उन करोड़ों लोगों में से एक को भी नहीं जानते जिन्हें आप अपने ऐटम बस से नेस्तनाबूद करने जा रहे हूं जिन्हें आप अपनी जंग की आग को ईंधन बनाना चाहते हैं जिनकी जली हुई हड्डियों के ढाँचे पर आप अपनी डालर की आलीवान हवेली खड़ी करना चाहते हैं मु पुरा यक्ौन है कि जेसे आप मु नहीं जानते उसी तरह मेरे इन करोड़ों भाई-बहुनों को भी नहीं जानते जो दुनिया के कोने-कोने में फंले हुए हु जो आप से और कुछ नहीं सिफं शांति से जिन्दगी बसर करने का अधिकार साँगते हैं। सगर आपको कहाँ फ़ुरसत हे कि उनकी गुहार सुनें। आपकी अपनी योजनाएँ हैं डालर का चक्रवर्ती साश्राज्य फंलाने के अपने सपने हें समूची दुनिया से अपने जूते का तलला चटवाने की अपनी ख्वाहिदों हैं। कोई ताज्जुब नहीं अगर अपने इन सपनों को सच करने के लिए इन को पूरा करने के लिए आप बड़े से बड़े क़त्लेआम इतिहास की बड़ी से बड़ी ललेमूरी और चंगेज़ी बरबादी और तबाही से भी बाज न आयें और मुक्त जैसे इन्सानों को भुनगों की तरह जला कर राख कर रे




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