शासनपद्धति | Shasanapaddhati

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Shasanapaddhati by श्री प्राणनाथ विद्यालंकार - Shri Pranath Vidyalakarta

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about श्री प्राणनाथ विद्यालंकार - Shri Pranath Vidyalakarta

Add Infomation AboutShri Pranath Vidyalakarta

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
( २ ) सत्तात्मक राज्यप्रशालीवाले देशों का उद्देश्य हैं । दिनपर दिन सभ्य देशों में राजकाये में जनता का हाथ बढ़ाया जा रद्दा है । कई देशों में ते खियों को भी सम्मति देने का अधिकार प्राप्त हो गया है । स्विट्जरलैंड ने किस प्रकार श्रादशे राज्य का पद अ्रहण किया है, यह हम श्रागे चलकर स विस्तर लिखेंगे, परंतु यहाँ पर यद्द लिख देना श्रावश्यक प्रतीत हेता दै कि स्विटूजलंड की शासन-प्रणाल्लो प्रजासत्तात्मक राज्य के सिद्धतां के श्रति समीप तक पहुँचती है । इसका कारश वहां पर जन-सम्मति-विधि तथा शक्ति-सविभाग क सिद्धति का श्रवलंबन ही कहा जा सकता हे । शासन-पद्धति की दृष्टि से युरापीय राष्ट्र अमेरिका के बहुत ही कृतज्ञ हैं । रा्रसेघटन का निर्माता अमेरिका दी है । जर्मनी, फ्रांस, स्विट्जलैंड श्रादि देशों को अमेरिका ने शासन- पद्धति के विषय में बहुत कुछ शिक्षा दी है। स्त्रिट्जलैंड ने तो श्रमेरिका को देखकर ही श्रपनी शासन-पद्धति का निर्माण किया है । जमेनी की शासन-पद्धति विचित्र ढंग की हे । यद्दी कारण है कि इस पुस्तक में जमेनी पर विशेष विस्तार से लिखा गया है, क्योंकि बिना ऐसा किए उसकी शासन-पद्धति को समभना पाठकीं कं लिये कठिन हा जाता । महासमर के उपरांत युरोप के कईं देशो की शासन-प्रथाली में बहुत रहोबदल ह गया है । उनमें से जर्मनी, झास्ट्रिया-हंगरी, रूस प्रभ्नति देश




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now