ज्ञान का अमृत | Gyan Ka Amrit

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutJain Dharma Diwakar
Add Infomation AboutGyan Muni Ji Maharaj
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
13 MB
कुल पष्ठ :
396
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
जैन-धर्मं-दिवाकर - Jain Dharma Diwakar
No Information available about जैन-धर्मं-दिवाकर - Jain Dharma Diwakar
ज्ञानमुनी जी महाराज - Gyan Muni Ji Maharaj
No Information available about ज्ञानमुनी जी महाराज - Gyan Muni Ji Maharaj
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)॥ 1कहा
सुख और जीवन
दुःख का कारण कया है ?
पापसे डरो
केर होकर भी गीदड़
जैसा कमं वषा फन
कर्म और पतभकड़ श
कर्मो की विलक्षण क्ति १
कर्म बया है ? १
कर्म शब्द का श्रं ६
कर्मों के दो भेद १६
परमाणु कंसे श्राकृप्ट होते है? २०
कमं श्रात्मासे कंसे जुडने है? २१
कंमंवाद का श्राविर्भावक्यो ? २२कमं की सत्ता में क्या प्रमाण है ? २५व्यवहार में कमं की उपयोगिता ३०जीव और कमं का सम्बन्ध कंसे ?३२
मूत्तं अमूत्तं को कंसे प्रभावितकरता है? ३३कम को शुभाशुभ रूप ३५
जीष भ्रौर कमं का सम्बन्ध कवसे है? ३६कमं अपना फल कंसे देते है? ४०बिजली का पंखा ४५बिजनी का अद्भुत नल, बल्व,
जीवित मनुष्य का रेडियो,टेलीविजन
मीजाइल
राडर, राकेट, टैलीप्रिष्टर,झपोलो
लुनोखोद बेरोमीटर कम्प्युटर
ईदवर कमं का फल नहीं देता
भगवद्गीता ओर कर्मफल
परमात्मा के तीन रूप
अशुभ कर्मो से बचो
कर्मों के आठ भेदबन्घ कया होता है ?
प्रकृतिबन्घ
स्थितिबम्ध
अनुभागवन्
प्रदेशाबन्धं
कमं की चार भ्रवस्थाए
कमं का निकाचित खूप
ज्ञानावरणीय कमं
दरशनावरणीय कमं
वेदनीय कर्म
मोहनीय कमं~
1४६
५दे
५६
५७१५
७६८9.४८२
द
ठर
८४
पद
ध.
2.1
८६
६३
दे
ड
User Reviews
No Reviews | Add Yours...