पदाम्रत | Padamrat

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
138
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)॥॥(५)सरीत लिख क्था सतदास, वाकी याही रीत।
राम कहत अघम तिर्या, यू मेरे परतीत ।१८॥भरगन जलवे सतदास, वाकौ योही सुभावे 1
राम नाम त्यारे सही, लं कोड भावं म्रमाव ।१६॥सुमरण कौजे सतदास, दीजै सुरति मिलाय ।
ररकःर का ध्यान से, मुडे न मोडी जाय ॥२०॥सतदास ससार के, नाम नाम सब एके ।
कण सरूपी राम है, कुकस नाम अनेक ।२१।भ्रसत शब्द सु सतदास, गिर तिरीया जल मांहि।
जिस दिन तो दूजा शब्दे, लिखिया कोई नाहि ।।२२॥राम नाम गलतानप्रद. मिले स होई गलतान 1
एही करता सर्प है, ये ही परम निधान ।1२३॥ररकार श्रनादि ब्रह्य, ये परम धाम विसराम)
भ्रौर सवेही सतदास, माया रूपी घाम 1२४वडा होता क्या वेर है, जो हरि पकड़े हाथ ।
सतदास लकड़ी वेधी, विन कपल विन पात ।।२५॥श्राठ पहर विच एक पहर, ञे मुख राम काय ।
वाको महिमा सतदास, मौपे कही न जाय ।२६॥श्राठ पहर बिसरे नही, पलक एक ही राम ।
वाका तो है सतदास, जीवत मुक्ति मुकाम ॥२७।।गोन्ल मे गुजरी तिरी. राम नाम उर धार ।
सतदास्र साची कथा, देखी सव ससार ।२८1| इत्ति ॥।
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