साहित्यकार चित्रावली | Sahityakar Chitravali

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : साहित्यकार चित्रावली  - Sahityakar Chitravali
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about ओंकार शरद - Omkar Sharad

Add Infomation AboutOmkar Sharad

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
खड़ी बोली को काव्म-भाषा के पद पर प्रतिष्ठित करने वाले हरिश्रौव जो का उन्नायक-व्यक्तित्व श्रत्यन्त प्ररणारुपद था ।झाप का जन्म सन १८६५ में उत्तर प्रदेश के श्राजमगढ़ जिले के निजामाबाद कस्बे में हुआ था । 1शिक्षा का क्रम झधिक न चल सका । नामंल परीक्षा पास कर के श्राप ने निजामाबाद में श्रध्यापकी शुरू की, फिर वर्षों तकराजस्व विभाग में सदर कानूनगों के पद पर रहे । यहाँ से भ्रवकाश «. ग्रहण करने पर पं० मदनमोहन मालवीय के श्नात्रह पर काशी हिन्दूविश्वविद्यालय में श्रवेतनिक हिन्दी प्राध्यापक का कार्य किया । श्राप संस्कृत, फारसी श्रौर उर्दू के प्रकाण्ड पंडित थे ।प्रारम्भ में भ्रापने नाटक तथा उपन्यास लिखे परन्तु शीघ्र ही काव्य-सूजन की श्रोर झाप की रूचि बढ़ी श्रौर थोड़े वर्षों के सृजनके बाद ही श्राप को खड़ी बोली का प्रथम महाकवि होने का श्रेय मिला ।श्राप की प्रमुख रचनाएं है-- रुविभणी परिणय, ठेठ हिंदी का ठाठ, श्रचखिला फूल, रसिक-रहस्य, प्रेम प्रपच, प्रेम पृष्पहार, काव्योपवन, प्रियप्रवास, कर्मवीर, चोखे चौपदे, चुभते चौपदे शरीर चेदेद्दी वनवास श्रादि ।'प्रियप्रवास' को हिन्दो साहित्य का महाकीव्य माना गया है ।सन १६९४ में श्राप हिन्दी साहित्य सम्मेलन के भ्रध्यक्ष हुए ।सन १६४१ में छिहत्तर वर्ष की श्रायु में झाप का देहान्त होने से हिन्दी साहित्य ने भ्रत्यन्त श्राकपक व्यकित्तत्व भौर महाकवि खो दिया । ७मो अयोध्यासिह ब उपाध्याय 'हरिऔध'द. ()जन्म : सन १८६४ निधन : सन १४४१




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now