वेदान्त दर्शन | Vedanta Darshan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गएएएएएएशएकस्शशफाए करशकरयशलस्सवश कल्याण ड पापा पाप' चिषय सूत्र ० पा० सू०जगद्रचना में झाकाशकालदिग्देश आदि से युक्क प्रकृति--. सर्वोपिता च तद्दशेनातू . ... .... ८. २प्रकृति भी जगत्‌ का कारण औरवह उपादानरूप--- प्रझृतिश्च प्रतिज्ञाद प्रान्ताचुपरोधातू .. .......... १ सातक्ाब्योमयाश्नानातू _..... .. * कन्न्ा हैं प्र कृतिनामक अव्यक्त परमात्माधीन हीजगत्कारण है न कि खतन्त्र--सूदस डि तदहत्दातू «० मनन र्‌ तदघीनत्वादर्थव तू न रत नयत्वाचचनात्व अर हैंजगत का उपादान कारण प्रकृति समानधरमी होने से--न विलक्तणुत्वादस्य तथात्वं च शब्दात्‌ २ त्रह्म से भिन्न प्रकृति और जीव-- विशेषणभिद्व्यपदेशाश्यां च ' नेतरो र अवस्थिवेशेष्यादिति चेन्नाध्युपगमादु भूदि २ जगत्‌ का सच्व प्रक्धति--सरवाययावरस्य २ प्रकृति के अभाव से दोषापत्ति-- कृत्स्रप्रसक्तिनिरवयबत्वशब्दकोपों वाटी.हीकिभव




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