नयी कविता | Nayi Kavita

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नयी दिशा १५. व्यक्तित्व के प्रति सम्मान जगा है तो वद्द भू दान यश के प्रणेता श्राचायं विनोवा भावे के प्रति} पर उनके प्रति भी भरद्वा अभी पिते युगो के कविरयो जैसे मेधिलीशरण गुप्त, सियारामशरण गु एवं वालङ्प्ण शर्मा नवीन श्रादि द्वारा दी ग्रधि व्यक्त हुई है । हालावाद की ध्वनि श्रव शांत हो गई है । उस मादक्ता के पीछे विदेशी प्रभाव था जिसे टिन्दी चाले दधिक नदी पचा सके । उसका श्नुकरण भी इसी से कटी नहीं हुश्ना, य्दीं तक कि उसके प्रस्तावक घच्चन ने भी श्रव उसने श्रपना पीछा छुड़ा लिया टै । नई कविताको श्राज य्न्य दो विदेशी मनौपियो ने प्रभावित कर रगगा हे--सरदले हैं मास्से जिनके नाम पर प्रगनिव्राद का द्ान्टोलन प्रारम्भ टुय्रा शरीर दुसरे हैं फ्रायड जिन्होंने बहुत आशा तक प्रयोगवाद को घ्ञाच्छादित कर रखा है | नयी कविता नयी परिस्थितियों को उपज है । देश की राजनीतिक स्थिति ददल ई । भारत स्वतन्त्र दो गया है श्रौर श्रतर्ग्ट्रीग द्ाघार पर उते सम्मान प्राप्त हुद्ना है दरतः हमारें फविया की वाणी में श्रव दौनता नहीं नुनाई पड़ती । राष्ट्रीय पताका, स्वतन्वता रार देशक गौरव का लेगर बहुत सी स्वनाएँ भी एघर लियी गरे हैं। रदस्यवाद के रूप में जो रषी-सद्दी श्रम्यात्स भावना चल रद थी, व समास दो गई है । पुराने छायायादी कविया में नयचेतनायाद हे स्यम श्ररपिदवाद विकसित हत्या ध, पर्‌ नए कवि चस्यात्न रोर धर्मक पिल्ल चिन्तना कसते नदीं दिखायी ठेते | धार्मिर शरीर च्रध्यान्म-मायना नोप ने का एक बहुत वदा जारण मास्सं-दशन न यढता प्रभाव है । पिछले कप्रियों को यपता नए फपि सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अधिक सजग प्रतीत दोते रूं । फॉपिता में सामाशियन्तय ग्य शधिए उधर कर या रदा है । सामाजिय-फल्पाण की योर, ज एमि फति उन्मुग्य गुए हे उसके मूनयभो श्रधिगनप्त स्य से माक्मयाद द} सामासिक्ता कं यह चेतना दर्म-सप्प फेस्प में माय याएँ ऐ । घाज दो 'पर्थ-दिपसता हो रिसों ने छिपी नदों है | राज न्य क ~ न चग पयार सूप से सर ने सरदबअस्त, चित्त प्रीर सु दे । मोतर से यए इटा




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