रास और रासान्वयी काव्य | Ras Aur Rasanvayi Kavy

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Ras Aur Rasanvayi Kavy by डॉ. दशरथ ओझा - Dr. Dashrath Ojha

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ६ ) श्राभीर लाति के रसमय व्रत्य रास ने कहीं साहित्यिक स्वरूप प्राप्त किया श्रोर कहीं धार्मिक रूप । श्रतः श्रन्त में यह कहना श्रनुचित न होगा कि-- बन्दौं ब्रज की गोपिका निवसत सदा निकुज प्रकट कियो संसार मै जिन यह रख को पुंज ॥ रुद्र काशिकेय प्रधान संपादक बिड़ला प्रंथमाला ना० प्र० सभा




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