हिन्दी काव्य - कुसुमांजलि | Hindi Kavya Kusumanjali
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation About. Dr. Dashrath Ojha
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
166
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about डॉ. दशरथ ओझा - Dr. Dashrath Ojha
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्र१--रामकाव्य का वण्यं विषय विष्णु के राम रूप की भक्तित है #
रामानन्द द्वारा प्रचारित विशिष्टाद् त के आधार पर इसका
विकास हुआ । द२--समस्त राम-काव्य की रचना, दोहा, चौपाई में ही श्रधिक
हुई । साथ ही साथ क् डलियाँ, छप्पय, सोरठा, सवेया, घना-
क्षरी, तोमर और त्रिभंगी छन्दों का भी कवियों ने प्रयोग
किया ।३--समस्त राम-काव्य प्रधानतः भ्रवधी भाषामें रचा गया। किन्तु
अवधी के साथ-साथ ब्रजभाषा का प्रयोग भी यथेष्ठ रूप में
हुआ। .४--राम-काव्य में नव रसों का प्रयोग बड़ी कलात्मकता के साथ
हुआ । किन्तु प्रधानतः शन्तश्रौरश्युगाररसकीरही। `५--राम-काव्य में राम के शक्ति, शील और सौन्दय तीनों गुणों
की प्रतिष्ठा हुई ।६--राम-काव्य ने सामाजिक क्षेत्र में संयम, श्राद्श और महान्
जीवन मूल्यों का प्रतिपादन किया ।७--राम-काग्य ने भत मतान्तरों ्रौर सामाजिक क्षेत्रों में फैली
विषमताओं का समन्वय रामकथा के माध्यम से बड़े सुन्दर ढंग
से हुआ है ।८---राम काव्य में प्रबन्ध श्रौर मुक्तक दोनों शैलियों मे रचना
हुईं । रामकाव्य के प्रतिनिधि कवि तुलसी है जिनका परिचय
दिया गया है ।कृष्ण-भक्ति शाखा--मध्यकालीन समस्त कृष्ण-भक्ति कन्य का
श्रेय बल्लमाचायं को ही जाना चाहिए.क्योकि उन्ही के प्रचारित सिद्धांतों
पर सुरदास तथा कूष्ण-मक्त कवियों ने रचना की । उन्होने ब्रह्मसूत्र,
उपनिषद् तथा गीता पर भाष्य लिखा भ्रौर शुद्धाद्रंत का प्रतिपादन किया ।
कृष्ण को पुरुषोत्तम मानकर उसे पूणं ब्रह्म के रूप में प्रतिष्ठित किया ।
बल्लभाचायं का मत जिसे दशन के क्षेत्र में शुदधादरैत कहते है, भक्ति के

User Reviews
No Reviews | Add Yours...