जो ज्ञान कोष प्राचीन कांड विदेक विभाग भाग - १ | Go Gyan Kosh Prachin Khand Vaidik Vibhag Bhag-1

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : जो ज्ञान कोष प्राचीन कांड विदेक विभाग भाग - १ - Go Gyan Kosh Prachin Khand Vaidik Vibhag Bhag-1

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
गोमेपका स्परूप । पद््नामसामाइधामाकम्म! प्राधर्तितः । सं इप्दषा प्रम्पणिठा सूतग पा । तेपां 'घोपयोगा डुपकतामां गा गोर्बावीप्ण्याद सारम्पाददा स्तेपये। गाइ्बषापहताप्रीलामुपद्तमस सामती- सार पूर्षमुत्पन्न! परपघयबे ० (चरक चिड़िस्सा ज* 1९%) ' शाबिकाक्सें सचमुच गो आदि पथण्णकों यशोंसे प्लुोमित किया जाता था उतका इप महीं दोता था | पत्ात्‌ इकबदड़े तर सरिप्पत्त, शामाक इब्याक तपा क्लाबिड चे लादि समुके पुज्रे पहन्ोंमें पप्ुघोंका प्रोक्षण दोते छगा । इसके थाई बहुठ समय प्बठीत दोनेपर राजा एपएरने कम दीप सच झड़ किया लौर लस्म पप्ठु त सिफते छत तब लत पाछुबोंके सभादमें गीबॉका लाससमत सुख किया शौधोंकी पद शा देखकर. सद मानिमाजकों बडा कह इन । गोलॉफा मॉस भारी डप्म शौर सरबसाधिक दोतेके कारण उस समय कोगोंकी लि ओर बुद्ि शक्ति मौमल्द हो पं शौर पंप सब दोनेडे कारण इसी एवब्के बजे गोबणसे शतिसार रोग इपपन्न हुमा । पाक इस चरकाचाबेके कथसका तलब सतत करें । इस में बब्की तीन लगस्थापं बताएं हें--- ( १ ) पढ़िले समबरें पहंमिं पछुषण मीं दोता था प्लुद गी आदि पहल को परशो्िं सुझोसित करके सत्कार से रखा छाता पा (९) दुच्रे समबम भर्ाद्‌ उसहै बे समपमें मनु के पुन्नोनि पशुनोंको पत्ते प्रोशण करनेकी रीति अकाई, (६) पश्चात्‌ तीसरे समपरमें प्रपप्रने सबये प्रथम दल मे गौका बज डिपा परतु इस्ड़ा सबने लिये किया । जिस्दोंने इस पशमें गोमांस कब उसको लठिसार रोग इरना, बोर तबसे शविश्वार सच कोगोंको सताता रद दे । इससे पद दिद्ध दोता दे कि भठि प्रादीत वैदिक काल में निर्मीस पट. दोते थे सप्प छाक्मों समांस पश पक हुए परतु इस कारूमें सी पो सारी हीं जाती पी. पश्यात्‌ बडडुठ जञापूिक कक बहु्ें पोषण झुरू किया परत इसडे बिक सच जनता ट्रइ भर गोबप जद हुआ दास शातिसार होग शुरू हुआ । इसारी बच संमति दे कि पं गोदण बहुत दिनहक जा ल होगा चमक समय शुरू हुआ (ला) को्गोको सी मद पसंद से हुआ आर रोग मी फछाप इस डिवे किर किसीने यह हुष्कसे छिपा ही से होगा । तात्पपं म्राधीत ककके बजोंमें थ पमुषभ इोता था लौर नदी गोदघ दोठा था । जिसमे किया डसमे बहुत भप्छी प्रकार डसका कह मोगा घोर उससे शुरू हुआ शतठिसार रोग शव सौ लखगठाकों कह दे रहा दे । पक बार पैसा सवागऊ लमुमद देखनेके प्ात्‌ पेसा कम कौन भड पुरुप दिए करेगा ह चरकाचायंक बतायि तीन काऊक इबतके तौत प्रकार जोर इमने इसी केखमें इससे पूर्व पपिपचमसी लोर प्रशक्ती साछीके पकरणमिं बतासे बिभारा इसकी परस्पर तुछूता पाठक करें शार भातिप्राचीत लादि बेदिक कल्कमें तिमासि शक प्रथा दोनेका लमुभव देखें । सब बातें मिदमिन् प्रमाजोंका विचार करनेछे दाद पड़ि पक हो कपसे विकाईं देने कर्गी तो बद्दी लिखित सत्प है, ऐसा सातना पोग्य दे (१५९) छुप्त-ताद्धित प्राक्षिपा । बेद्मंदतिं कर ऐसे मंत्र हैं कि भरददं सप्दार्थसे खुछ लात्प् थीर प्रतीत दोता दे अदाइरणडे किये देखिये--- गिर भीणीत मत्सश्मू । (का १४६९४) इसका झम्दाव॑ यदद दे ( गोसि।) शीलोंफ़ि साथ ( मच्यरे ) सोम ( भ्ौभीत ) पकाबो । ' ऐसे मैच देखकर कोण ज्ञसमें पते दें कि थइ गोमाँसके साथ सोम पकानेका पा मिछावेकी बाला दे | परेतु पढ़ स्पाकरयक जानते कारण हम शत्पन्न दोठा दे । व्याकरण तड्धित-प्राबबके झाव अच्छा परिचय हुबा हो थइ भ्रम नहीं दो सकता इस बिपषस भी बास्कचार्यडा कपत देखिसे-- अथाप्यस्पां लायितेम छस्स्वचाधिगमा मथरित * गोसि। झीणीस मस्लरंसिति ' पयसः । ( निदक्त र५ 0 पद्ित-मापब होतेके समात लदाके कि सपूेझा मदोग किपा खादा इ ददाइरण सोम! शौलीत सर्सर इसमें गत शप्दका लब दूब हे। इसी दिवषरों बास्काचाएंका थौर कथत सुतमेपोरण दे--




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now