ऋषिमंडलयंत्रपूजा | Rishimandalyantrapuja

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutPandit Manoharlal Shastri
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
54
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about पंडित मनोहरलाल शास्त्री - Pandit Manoharlal Shastri
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(५)अथ-उसके बाद सोलह कोठोंवाला एक गोछाकार खेंचना चाहिये ।उन सोरृह कोटोमें चतुर पुरुषोको एेसा लिखना योग्य है--उर# हीं
भावनेन्द्राय। १ । 3 ही व्यततरेन्राय । २। ॐ हीं ज्योतिष्केन्द्राय । ३।
ॐ हीं कस्येन्द्राय £ ॐ हीं श्रुतावधिम्यो नमः ५ ॐ हीं देश्चावधि-
भ्योनमः ६ ॐ हीं परमावधिम्यो नमः ७ ॐ हीं सवोवधिम्यो
नमः ८ ॐ हौ बुद्धिछद्धिप्रप्तेम्यो नमः ९ ॐ हों सर्वोंधघधिक्रुद्धि-
प्राततिभ्यो नमः १० आओ हीं अन॑तबलरदिप्रापतेभ्यो नमः ११ ओंदीं
तप्तद्धिप्रात्तेभ्यो नमः १२ दही रसद्धिप्रापतेभ्यो नमः १३२ आओ हीं
विक्रियर््धिप्रातेम्यो नमः १४ ओ ढीं क्षेत्रद्धिप्राह्ेम्यो नम: १५ ओ हीं
अक्षीणमहानसध्धिप्रापतेम्यो नमः ॥ १६ ॥ १४॥ततश्च वरय; कायः चतुर्विशतिकोष्टकः ।तत्र ढेख्याश्र कतब्याश्रतुर्विद्तिदेवता: ॥। १५ ॥।अथे--उसके पीछे चौवीस कोठोवाला गोलाकार बनावे उनकोटाम चौवीस जैन दासन देवताको स्च । ' तद्यथा वो एते है-ओं
हींश्रियै १ हीं दीद्ये २ॐ हीं तये ३ ॐ हीं लक्ष्म्यै ४ उही
गौर्ये ५ ॐ हीं चडिकायं ६ ॐ हीं सरस्वत्यै ७ ॐ हीं जयायै <
ॐ हीं अंबिकायै ९ उॐ ही विजयायै १० ॐ हीं हिनाये ११ उ हीं
सजितये १२ ॐ हीं नित्यायै १३ ॐ हीं मदद्ववायै १४अॐ हीं
कामागाये १५ ॐ हीं कामवाणयि १६ ॐ हीं सानंदायै १७ ॐ
हीं नंदिमालिन्ये १८ ॐ हीं मायायै १९ आं दीं मायाषिन्यै २० आं
हीं रौद्ये २१ भो ही कलाये २९ आओ हीं काल्यै२३ ओं ही कलि-
प्रियायै २४ ॥ १९॥ततो मायाज्निकोणे च देयं पत्रमनोहरं ।सवेविघ्रापदं चेतद्धीकारं भांतसंयुजं ॥ १६ ॥
User Reviews
No Reviews | Add Yours...