प्रद्युम्न चरितम | Padhumtra Charitam

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
244
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्रथमः सर्गः |कलोलहस्तेस्तर्खयदीयं `
नितबमास्फाल्य विकयमानः।
परायते दूरतरं पयोधिः
परांगनासंगमयेन नूनम् ॥ २३ ॥
यदीयरूपातिदायं निरूप्य
रोकः समीपं रसवत्तयाप्य ।
कटठोरभावात् धतिषिद्धसगो
निवतेते बीडितयेव खिघुः ॥ २५॥< ९नवेनेवैः प्राथतकैः समदय
महोरमिंहस्तेः कृतरल्लराशिः ।
गंभीरनादं निनदल्िवान्धि-
यदीयसेवाभिरते विरेजे ॥ २५ ॥
यदीयवास्तन्यकररनेकै -
मुक्तादिरिक्तीकृतमध्यदेशः ।
ध्वनिच्छलेनोध्वेतरंगहस्तः
शालादवहिः पूृत्कुरुते पयोधिः ॥ २६ ४
लावण्यरूपादिगुणातिरेकं
यत्छुद्रीणामवर्लोक्य লন ।
अद्यापि तद्धिस्मयतः खराणां
चलापि मर् निश्चरखुतामवाप ॥ २७ ॥
चेव्यालटया यत्र समाह्वयति
दूरादिवोश्चः रततूयैनाद्ाः ।
भव्यान् पताकाकरपललवेन
जिनेन्द्र पूजार्थमितस्ततोपि ॥ २८ ॥` नीखाच्मनिमौणनिशातमालां
विभ्यायमानां पुरतो ।ेरोक्य ।
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