अभिषेक | Abhishek
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
641 KB
कुल पष्ठ :
122
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मेरी हर-वाणी में कोई,
कथा प्यार की लिख जाती हो।
जीवन के हर-
कण पर मुझको,
न पमषष द शाम हो।
९) 1 £ = ॥
सच कहता हूँ- ¶ ष्टि
तुम्हें हृदय से, श
मैंने बेहद प्यार किया है। `
तेरी खातिर-
जन्म धरा पर,
रूपसि कितनी वार लिया हे
मुझे याद है-
बार-बार तुम,
मिल-मिल कर ही हट जाती हो।
मेरी होकर-
और मुझी से,
आखिर में तुम कट जाती हो।
लेकिन अव ज
संभल गया ट
ऐसा कभी न होने दूँगा।
भृदुल प्यार की-
इस वेदी परमन को कभी न रोने दूँगा ।अभिषेक 11
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