बुद्धि बनाम श्रद्धा | Buddhi Banam Shraddha

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शप्त राज्य-वश खतम हय गया था, ओर अत्तर भारतमे वहुतसे राज्य और रियासते कायम हो गई थी) दक्षिणमे पुलकेरिनने चाखुकय-सास्राज्य कायम्‌ कर लिया था। कानपुरसे थोडी दूर कन्नोज नामका छोटा-सा नगर है। कानपुर आजकल एक बडा शहर है। लेकिन वह अपने कारखानो और चिमनियोकी वजहसे वदसूरत हो गया है। कन्नोज एक मामूली जगह हैं, गाँवसे कुछ ही बडा होगा। लेकिन जिस जमानेका जिक्र म कर रहा हुः उस जमानेमे कम्नोज एक बडी राजधानी थी, और अपने कवियो, कलाकारों और दार्शनिकोके क्तिए मणहूर थी। कानपुर उस समय तक पदा नहीं हुआ था और न कई सौ वर्षों बाद तक पैदा होनेवाला था। कन्नोज नया नाम है। इसका असली नाम कान्यंकुबन्ज यानी ' कूवडी लडकी ' है । कथा है कि किसी प्राचीन ऋषिने काल्पनिक अपमानसे गुस्सेमे आकर एक राजाकी सौ लडकियोको साप दे दिया था, जिससे वे कुबडी हो गई थी। उस समयसे यह शहर, जहाँ ये लडकियां रहती थी, ' कुबडी लडकियोका चहर' यानी कान्यकुब्ज कहलाने लगा। लेकिन सक्षेपके लिए हम इसको कन्नोज ही कहेंगे । हणोने कन्नोजके राजाको मार डाला और उसकी रानी राज्यश्रीको कंद कर लिया । राज्यश्रीका भाई राजवर्धन अपनी वहनको छुडानेके लिए हृणोसे लड़ने आया । उसने हुणोको तो हरा दिया, लेकिन धोकेसे खुद मारा गया। इस पर उसका छोटा भाई हर्षवर्धन अपनी वहन राज्यश्रीकी तलाशमे निकला । यह बेचारी किसी तरहसे निकलकर पहाडोमे जा छिपी थी, और अपनी मुसीवतोसे परेशान होकर उमने आत्महत्याका निदचय कर लिया था। कहते है वह भस्म होने जा रही थी कि हषने ढूँढ लिया और उसकी जिन्दगी वचा खी) अपनी वहनको पाने और बचानेके वाद हर्षने पहला काम यह किया कि उस नीच राजाको, जिसने उसके भाईको धोकेसे मार डाला था, सजा दी । और उसने सिफं इस नीच राजाको ही सजा नहीं दी, वतिकि सारे उत्तर भारतकों बगालकी खाडीसे अरवके समुद्र तक, और दक्षिणमे विध्य पर्वत तक जीत लिया । विव्याचलके वाद चालुक्य-साम्राज्य था और हपंको यहाँ रुकना पडा, हषवर्धनने कन्नोजकों अपनी राजधानी वनाया । वह खुद कवि और नाटककार था, इससे उसके पास कवि और कलाकार जमा हो गये और कन्नोन एव मथहूर शहर हो गया। हपं पक्का वौद्ध था। इस समय वौद्ध १३




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