भारतवर्ष का भूगोल | Bharat Varsh Ka Bhugole

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
11.66 MB
कुल पष्ठ :
342
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)तीसरा अध्याय की शहरकी हैं । अगर समुद्र की गददराई २०० गज कम हों जावे तो लड़ा
[ भी श्रौर आगे प्राय: ५०० सील तक सूखी भूसि निकल जहां
भारतवर्ष से पैदल जा सकते हूं ।
पच॑तीय प्रदेश
विशाल हिमालय पंत दुनिया भर के पहाड़ों से कहीं मधिक
ऊँचे हैं । इनकी पव॑त-श्रेणी पामीर ( वासे दुनिया या संसार की छत
से आरस्भ दोती है । दक्षिण-पू्व की शोर मुड़ले के कारण इस पवतश्रेणी का झाकार तलवार के समान हो गया है । इस चत्तरो पनतीय
प्रदेश में हिस/लय की एक ही श्रेणी नद्दीं है । वास्तव में यहां कई३--पढ़च्गांव का पर्वतीय दृश्य श्रोर पुलपवचत्त-श्रेणियां हें । इनके बीच में ठुगम हिमागार ौर डरावनी
चाटियां हैं । इस पएवंतीय प्रदेश के दक्षिण में सिघ 'छौर गड्ठा का
चपजाऊ शौर नीचा सैदान है । इसके इत्तर में तिव्वत का प्राय: तीन
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