कालिदास के ग्रंथो पर आधारित तत्कालीन भारतीय संस्कृति | Kalidas Ke Grantho Par Aadharit Tatkalin Bharitiya Sanskriti

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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- 3...कैअध्याय विषय | ` पुसं,६. गृहस्थ जीवन १२५८१४९दाम्पत्य जीवन, आदश, व्यावहारिक रूप; पत्नी का कर्तव्य ओरं उत्तरदायित्व-गृह और बाह्य; विरह की अवस्था मे पत्नी, गर्भिणी पत्ती; विधवाभों की अवस्था; सतीप्रथा; परदे की प्रथा; समाज में नारी की स्थिति; नारी जीवन पर सांगोपांग दृष्टि-कन्या रू, शिक्षा, कर्तव्य, शिक्षा का आदर्श, पेशा, कन्या जीवन के आदश; युवती- पत्नीरूप--कर्तव्य ओौर आदश, मनोरंजन साधन; मातुरूप--गौरव और आदर । |७. खान-पान | १५०-१६४भोजत्त के प्रकार-( १) अनाज--यव, चावरू-शालि, नीवार, कलमा, श्यामा; तिक, छाज, दाल । (२) दूध तथा इसकी परि- वर्तित आकृति | (३) मधु ओर मिष्ठान्न। (४) मांस और ` मछली, मांस के प्रकार, प्राप्ति-साधन । (५ ) फल । ( ६ ) मसाले |पेय-पदार्थ--मदिरा--प्रकार, अन्तर ।ट, वेडा-भूषा १६५-२४१ कालिदास की सौन्दर्य-प्रतिष्ठा, स्त्री-सौन्दर्थ, पुरुष-सौन्दयं; सौन्दयं की परिभाषा तथा तत्तव; प्रयोजन ।(४ ) वस्त्र--वस्त्रों के प्रकार--कौशेय, क्षौम, पत्रोर्ण, कौशेय- पत्रोर्ण, दुकूछ, हंसचिह्न दुकल, अंशुक, तनूनि, भारी वस्त्र, मृगछाला, वल्कल; वस्त्रों के मुख्य रंग । |साधारण वेश-भूषा; दुकूछ के पहनने का ` ढंग; कूर्पासकं ओर स्तनांशुक; ओद्नी-गोढने का दंग; उष्णी, जता । .वेश-भूष। के प्रकार--शिकारो, डाकू , मछुआ, ঘননী লহা,. द्वारपाल, अभिसारिका, तपस्वी, . राजा, किरात, शिव गणों आदि की. वेश-भूषा । वैवाहिक वेश-भूषा; विरहिणी और विरही की वेश-भूषा; वरती की वेशभूषा, यज्ञ के समय का वेश, छात्र वेश, ` स्तानीय वेश, राज्याभिषेक, की वेशभूषा, ऋतु अनुसार वेरा--ग्रीष्मकाल का वेश, वर्षाकालीन वेश, शरदकाीन वेश, हेमन्त वेश, शिशिरकारीन वेश, वसंत समय का वेश ।




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