विज्ञानं और सभय्ता | Vigyan Aur Sabhyata

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Vigyan Aur Sabhyata by रामचन्द्र तिवारी - Ramchandra Tiwariसिद्धि तिवारी - Siddhi Tivari

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विज्ञान का विकास की उत्सुकता विज्ञान के प्रति जागी । पाउशालाओं के शिक्षकों ने इसकी ओर ध्यान । হণ | दवाइयाँ वेचने वालों ने विज्ञान को सहायता से अच्छी ओर नयी ओषधियाँ बनाने वे प्रयत्व आरम्म किये। सेनापतियों ने युद्ध में विज्ञान की सहायता चाही ओर नाविकों ने समुद्र-यात्रा को अधिकाधिक सुरक्षित बनाने के लिए विज्ञान की शरण ली । योरोपीय जीवन में विज्ञान के प्रति एक उत्सुकता फैल गयी । इसी समय विज्ञान के ज्षेत्र में एक नवीन दृष्टिकोण का प्रवेश हुआ | ६. नाप-तोल--विज्ञान के तुरन्त उपयोग में ले आने की वात वैज्ञानिकों ने पीछे डाल दी | वल दिया जाने लगा ज्ञान के लिए ज्ञान प्राप्त करने पर; प्रकृति के रहस्यों को खोजकर मनुष्य की दार्शनिक उत्सुकता शान्त करने पर । अब तक का जितना विज्ञान मनुष्य के पास था वह प्रायः सव शुणात्मक খা | मनुष्य ने मोटे तोर से मिन्‍न-भिन्‍न वस्तुओं के विषय में जाना था, पदाथ के निर्माण के विषय में कल्पवाएँ की थीं। पर इस विषय में न कुछ परीक्षण किये थे और न विभिन्‍न वस्तुओं को वारीकी से नाप-तोल कर उनका परिमाण निश्चित किया था। अब कसौटी वनी कि सिद्धान्त सच्चा वही, जो परीक्षण करने पर सत्य उतरे | ओर परीक्षुए में पूरो नाप-तोल से काम लिया আই | नापने-तोलने की ओर मनुष्य का ध्यान तव से हटा नहीं । आज जो विज्ञान की इतनी उन्नति दिखाई दे रही है इसका प्रमुख करण उसका ठीक-ठीक नाप-तोल और परीक्षण पर आधारित होना है। आज विज्ञान की नापने-तोलने की सामथ्यं इतनी वड गयी है कि जन-साधारण को यकायक उस पर विश्वास नहीं होता। मन॒ष्य जिस सबसे छोटी लम्बाई को नापने में समर्थ हुआ है वह एक इंच का तीन अरववाँ भाग हे। विजली उद्योग में वह धातु की ऐसी पत्तरों को काम में लाता हैं, जिनकी मोटाई एक इंच का लाखवाँ माग हैं | वह लम्बाई की जिस इकाई का उपयोग करता है वह एक इंच का ढाई खरबवाँ माग हे और एक “मिली एंग्स्ट्रमः ऋटलाता ই । बड़ी-बड़ी लम्वाइयाँ भी उसने नापी हैं, वह आज जानता है कि श्र वतारा पृथ्वी से लगभग ७३५ खरव मील दुर है । तोलने म मो मनुष्य ने इसी प्रकार उन्नति की है | किसी भी अच्छी प्रयोगशाला में ऐसी तराजू मिल सकती है जो एक माशे का दस लाखवाँ भाग सही-सही तोल सके । आज इस दिशा में मनुष्य इतना समर्थ हैं कि उसने पदार्थ के परमाणुवों में स्थित प्रोटोन के मार का मी पता लगा लिया हैं यह एक ग्राम का (जो लगभग एक माशे के वरावर होता हे) लगभग पाँच हजार शंखवाँ भाग है। इलेक्ट्रन प्रोटोन से लगभग वो सहल गुना हल्का होता है । परीक्षण और नाप-तोल से अनेक समस्‍यायें उत्पन्न हुई और उनका समाधान करने के लिए गणित ने उन्नति की | यह विज्ञान सहसों वैज्ञानिकों के योग से निर्मित हुआ है और प्रत्येक नवीन वैज्ञानिक ने पूर्व-प्राप्त ज्ञान को अपने नवीन अध्ययन और अनुसन्धान का आधार बनाया है | ७, मनुष्य की शक्ति सीसा--विशुद्ध विज्ञान के अन्वेपकों के पास स्वों ज्यों /211/




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