सरल नागरिक शास्त्र | Saral Naagrika Shastra

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Saral Naagrika Shastra by दयाशंकर दुबे - Dayashankar Dubeyभगवानदास केला - Bhagwandas Kela

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भगवानदास केला - Bhagwandas Kela

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ३ ) . नवाँ परिच्छेद । राज्य ओर उसके तत्व राज्य ओर अन्य समूददों में मेद--राज्य के तत्व--जनता-- भूमि--राजनेतिक संगठन--प्रभुत्व शक्ति | प० ९३-१०३ दसवाँ परिच्छेद : राञ्य की उत्पत्ति मुख्य-मुख्य सिद्धान्त-- देवी सिद्धान्त--आर्थिक सिद्धान्त--शक्ति- सिंद्धान्त-सामाजिक इकरार सिद्धान्त-विकास सिद्धान्त | प्रृ० १० ४-११९ ग्यारहवाँ परिच्छेद । राज्य की प्रशुत्व-शक्ति प्रभुत्व-शक्ति के लक्षण-:प्रभ्ुुत्व-शक्ति अबाघ होती है--प्रभुत्व- शक्ति के छिद्धान्त की आलोचना-राज्य को प्रभुत्व-शक्ति कहाँ होती है !--राजनेतिक प्रभुत्व-शक्ति और जनता--विशेष वक्तव्य | प° ११५०-१३ १ बारहवाँ परिच्छोद ¦ रान्य ओर व्यक्ति कया राज्य की उत्पत्ति से पूर्व मनुष्य स्वतंत्र या सामाजिक जीवन में वैयक्तिक स्वतंत्रता--वैयक्तिक स्वतंत्रता की रक्षा-राज्य का सावयव ठिद्धान्त- स्वतंत्रता का विशेष अथ | पृ० १३१-१४३ तेरहवाँ परिच्छ द ; राज्यों के भेद नंगर-राज्य और देश-राज्य--राष्ट्र-राज्य--पुरोहित राज्य और लीकिक राज्य--प्रभुत्व-शक्ति के विचार से राज्यों के भेद--श्ररस्तू का मत-राजतंत्र--श्रवैध तंत्र--वेध राजतंत्र--पुश्तैनी या पैत्रिक गजा- निर्वाचित राजा-राजतंत्र के गुण-दोष --उच्च जनतंत्र-- प्रजातं । | १० १४४-१६६




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