हिंदी में अर्थशास्त्र और राजनीति साहित्य | Hindi Me Arthashastra Aur Rajniti Sahitya

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Hindi Me Arthashastra Aur Rajniti Sahitya by दयाशंकर दुबे - Dayashankar Dubeyभगवानदास केला - Bhagwandas Kela

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तफशास्त्र साहित्य 0 ग्र्थशास््र की सम्भवत मवसे पटली पुस्तक रई । सरकारी प्रकाशनः विभाग द्वारा प्रकाशित है । विद्याथियों के उपयोग के लिए, (्पोलिरिकल इकानामीः के प्रारम्भिक सिद्रान्तों का परिचय देने वाली एक पुस्तक स्कृलों के इन्स्पेक्टर-जनरल ने प्रकाशित करायी थी, उसका यह श्रनुवाद दै । २--चात्तोपयोगी अर्थशाख । ले०--श्री° व्रजनन्दन सदाय | यह सन्‌ १६०६ में नागरी प्रचारिणी सभा, ररा; द्वारा प्रकाशित छोटी सी पुस्तक है । इसमें ्राठ पाठ हैं, उनमे कुछ मोंटी-मोटी वातो की चर्चां की गयी है । मूल्य =} ह । ३ -'अथशास्त्र प्रवेशिक' । ले०--पं० गणशदत्त पाठक । यह सन्‌ १६०७ ई० सम इश्डियन प्रेस, प्रयाग, से छुपी । इसकी कई त्ावू- त्तियाँ हो चुकी हैं। सशोंधित संस्करण की वड़ो श्यावश्यक्ता है । मूल्य) है। पैसा । ले०--पं० चन्द्ररोखर शर्मा । यह “पाटलीपुत्र” कार्यालय, पटना, से प्रकाशित हुई । इसकी भाषा च्छ मनोरञ्चक है । इसम विशेषतया उत्पत्ति, वितरण श्रौर राज्य-कर पर ही संक्षेप मे विचार किया गया है । विनिमय पर बहुत कम, श्रौर उपभाग पर तो प्राय कुछ भी नहीं है । मूल्य ।*], पप्ठ सख्या ६१ | ५--रू म्पत्तिरास्र । ले० -प० महावीरप्रसाद द्विवेदी । वह शपने विपय की पहली बड़ी पुस्तक हैं । सरल श्र सुवोब भी है। इमम स्थान स्थान प्रर भागतीय उदाहरण दिये गये हैं । श्रावश्यक पारिभापिक शब्दो के उपयोग मे भी सुयोग्य लेखक ने श्रच्छा परिश्रम किया दै । यह पुस्तक कई वर्ष तक इस विपय के लेखकों के लिए. बहुत लाभकारी रही है। पर, श्रव इसमें श्राधुनिक, नवीन विचारों का श्रभाव प्रतीत होता है । यह पुस्तक शव प्रायः अम्राप्य है । काशक (इडियन प्रेस; प्रयागे) की इसका नया सशोधित संस्करण प्रकाशिन करना चाहिए. ।




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