संचिता | Sanchita

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Book Image : संचिता  - Sanchita
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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संचिताजनवरी, १६१६मार्गगा मे कमी न तुमसे,कोरे भी उपहार । मेरे हृदय-धाम में होगा,जहाँ तुम्हारा वास | तहाँ शीघ्र में हो जाऊँगा,निश्चय उच्च उदार । स्वार्थ कपट ३्षां का मन में,नहीं रहेगा लेश। उन्हं बहा देगी पल भर में,पावन दृग-जल-धार । क्रोध, विरोध, मोह) मद, मत्सर,लोभ, क्षोभ, अभिमान | सभी तुम्हारे प्रबल अनल में,होंगे जल कर क्षार | में न करूंगा कभी भूलकर,अपने मन का काम | मुझ पर होगा प्रेम! तुम्हारा,सदा पूण-अधिकार । गाऊँगा में सदा तुम्हारे,स्वर में जीवन-गीत । होगा लीन तुम्हीं में मेरा,सुख-दुखमय संसार ।




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