संचिता | Sanchita

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Book Image : संचिता  - Sanchita
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दया क्षमा ममता आदिक हैं,तेरे रतां के भाण्टार; हैं निमल जल, शुद्ध वायु ही,तेरे जीवन के उपहार |छल से रहता दूर किन्तु तू, बल-पोरुष ,, में हे भरपूर; तेरे जीवन-धन हैं जग में, बस किसान एवं मज़दर ।कोयल तुभे सुना जातौ है,मधुमय ऋतुपति का सन्देश; खेतों मे पोघे उग-उग कर,देते हैं तुकका उपदेश |जग को जगमग करनेवाला,है तुकमें न प्रकाश महान; पर मिट्टी के ही दीपक से,रहता है तू ज्येोतिष्यान ।9आस




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