गल्प - पारिजात | Galpparijat

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : गल्प - पारिजात  - Galpparijat
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about सूर्यकांत - Suryakant

Add Infomation AboutSuryakant

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
भूमिका |] गल्प-पारिजात १३ ही इनमें स कुछ की रचनाओं मे कहीं कहीं घाराप्रवाह का उथनिक्रम, भावव्यंजना की उखड्‌ पुस्‌, शब्दां ओर वाक्या की शिथिल उठ-बैठ या उनका अलगविलगपन इस सीमा का पहुँच गये हैं कि उन्हें ठीक किये बिना इनकी रचनाओं को अवोध छात्रों के संमुख रखना अनुचित समझा गया हैं; सपादक न रसे स्थलों पर भी यथेए्ट परिवतेन किया है । जह वाक्य बिन्यास के औचित्य ही की अनुचित उपेक्षा की गई हो, वहाँ लिये औरमेद का और अलुखार तथा अनुनासिकाक्तरों के सदपयोग का कहना ही क्‍या । इन बातों मे हस्तश्षप न कर इन्द मालिक रूप में ही मुद्रित कर दिया गया हैं। टिदीकथा- लेखकों के अधेबिराम, बिराम, डेश, हाइफन आद के उपयोग को देखकर तो कस भी व्याकरणविद्‌ का मस्तिष्क चकरा जायगा; इन्हें भी कुछ स्थलों को छोड़ ज्ञेसे का तेसा छाप दिया गया है ।प्राथना और आशा है कि इस प्रकार की खटकने वाली घ्रुटियों पर भविष्य मे हिंदीकथालेखक ध्यान देंगे झर कला> ২১और भावों की द्टि से भव्य संपन्न हुई अपनी रचना ओं को भाषा की दृष्टि से भी परिमार्जित तथा परिपूत बनाने का प्रयत्न करेंगे ।হল हार्दिक प्राथना के साथ हम उन सब कथालेखकों कते कोटिशः धन्यवाद देते हें, जिनकी मनोरंजक कहानियाँ वारिजञात में उद्छुत की गई हैं। परमात्मा करे, उनकी रतिर्यो




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now