किरण - वधू | Kiran - Vadhu
श्रेणी : काव्य / Poetry

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)किप्ण-वधू६ ओर विषएक बडे प्रख्यात नगर के
रम्य दीर्घ स्टेशन के पास---
स्टेशन, गति का निखिल रूप
वह, ममता प्रीति-रीति का
बञ्चक, जहाँ तृषातुर को| ¦ भी तो विना मूल्य के
प्राप्पय नहीं था--बाहर से भीतर, भीतर से
बाहर को पहुँचाने वालेरेल पार कर बने मार्ग की दूर,
बहिर अतिम सीमा परনতি रहते;बालक बुद्ध और वनिता
নী भूखे अमिट दया के पात्र
बहुत से भीख मॉगनेवाले।
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