वैशेषिक दर्शन | Vaisheshik Darshan

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Vaisheshik Darshan by स्वामी दर्शनानन्द सरस्वती Swami Darshananand Sarswti

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पेशेपिक दर्शन । (१३ ) करना मुक्ति है, तो केवल उस के दूर करने को प्री पुरुषाथ माननेमें कोई प्रमाण नहींहै, अतः छुःख दुर करनाही सुक्ति है प्रश्न--फ्या छः पदार्थों के अतिरिक्त और कोई पदार्थ नहीं “है ? उत्तर--संपूर्ण धस्तु जो सत्ता रखती हैं, इन छः पदाथों में आजाती हूँ इन से पृथक कोई. नहीं रहती | 8 प्रश्त--द्वत्य किनने हैं ! ५ ˆ उत्तर--द्व्य नौ हे, थौर वे ই ই प्रथिव्यापरस्तेनो बयुरकाशं कालो दिगासाः मन इति द्रव्याणि ॥ ५॥ झर्थ-पृथिवी, जल, अग्नि, धाथुं, आकाश, फाज्न, दिशा, श्र.ध्मा छोर मसल ये नो हव्य हैं । त्ति” शब्दुसे यद संजित करदिया कि द्रव्य कौदी हैं थूनाधिक नहीं সহ্ন--ই ঘী লুছ্য फेसे है, एम तो इन से अधिक भी पे हैं। यथा-झुवरण । स फो न तो पृथिवी द्यी कह सकते हैं, क्योंकि इस में गन्ध नहीं है । न इस को जलं कह सकते ছি, ययोकति चिकनाहइट और वहने का गुण 'नहीं।न इंसकों . तेज कद सकते है, पयो के इख मेँ गुत्त्य (वभ) है और , श्रि में गुष्त्व नहीं | इसी प्रकार चांयु, आकाश, समय , दिशा, अग्मा और मन भी नदीं कद्र सकते प्थोक्रि श्न सव, में भी विरुद्ध गुण पाये जाते हैं । नतः सुरणं नौ से श्रलग दसवां द्रव्य है | उत्तर--यद आज्षिप ठीक .नहीं क्योकि खुबर्ण मिश्रित द्ध्य है भला मिश्रित की एक ठच्य के साथ किस प्रकार तुलना हो सकती है ? छुवर्ण में तेजका अंश अधिक है, अतः सुवणं तैजस , कुद्ाता है । प्रश्न--अस्यकार अखयुक्त भी है और नय द्र॒व्यों में भी नहीं है। शझतःवह अलग दसवां द्वठप्र क्यों.नहीं ? - उच्चए--अन्धकार तमोगुण अर्थात्‌ पृथिवी का धर्म है धर्म गण में सम्मिलित होता है। ऋप) अन्धकार घर्म है दृब्य नहीं। प्रश्न--लाइन्स वाले था और लोग भी छुं को एवर्‌ नहीं, दन्यः मानते हैँ । कि चना




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