मेवाड़ के महाराणा और शाहंशाह अकबर | Mewar Ke Maharana Aur Shahnshah Akbar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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निदेशक हारद् झाकर मटट अफटिक संस्थान इस पुँस्तक का प्रकाशन हमारे लिंए विशेष संतोष श्रौर प्रसन्नता का विषय है । यद्यपि महाराणा प्रताप को राष्ट्रीय सम्मान श्रौर श्रखिल भारतीय महत्व श्राप्त है राष्ट्रभाषा में श्रथवा किसी श्रस्य सापा में कोई ऐसा ग्रत्थ उपलब्ध नहीं है जिसमें विस्तार से उनके जीवन तथा चरित्र का वर्णन एवं विवेचन हो । इस कमी को ध्यान मे रखकर ही इस पुस्तक के लेखक ने दस वर्प हुए महाराणा प्रताप की संक्षिप्त जीवनी लिखी थी जो नेशनल चुक ट्रस्ट द्वारा 19 67 में राप्ट्रीय जीवन-चरित माला के श्रन्तर्गत प्रकाशित की गयी थी । इसके दो संस्करण निकल चुके हैं और इस समय यह श्रप्नाप्य है । इस प्रकाशन की दो सीमाएं थीं एक तो इसका श्राकार पुर्व-निर्धारित था इसलिए इसमें कई श्रायश्यक वातो का समावेश नहीं किया जा सका दूसरे महाराणा प्रताप के पिता श्रौर पुत्र के कार्यों का विवेचन इससे ससाविप्ट नहीं हो सका और बिना इसके उस राष्ट्रीय संग्राम का पुरा स्वरूप समभा ही नहीं जा सकता जो मेवाड़ के इन तीन सहाराणाझओ ने तथा उनकी समथेक बहुसंख्यक सर्दजातीय जनता ने उठती मुगल सत्ता के विरुद्ध श्राघी शताब्दी तक लड़ा था । यह संग्रास उस भारतीय परम्परा का श्रविभाज्य अंग है जिसके कारण इस देश ने सदा श्राक्रमणकारी तथा श्राततायी का सामना बड़े से बड़ा वलिदान करके शी किया है श्रीर ऐसा क्रम बना लिया है कि इस प्रयत्न में पराजय भी भावी प्रयत्न के लिए प्रेरणा का काम देती रही है। जिस स्वाधीनता संग्राम के फलस्वरूप हमारा देश स्वतन्त्र हुमा है उसके लिए महाराणा प्रताप एक प्रेरणा- रहे हैं उनके विषय में श्रधिकृत जानकारी एक राष्ट्रीय श्रावश्यकता है उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का सहज स्वाभाविक तरीका थी । श्राश्चयं है कि ऐसे व्यवितत्व का जीवन-चरित्न कसी श्रधिकारी विद्वान को इसके प्रणयन के लिए प्रेरित नहीं कर सका । इतिहास-क्षेत्र मे लेखक का प्रवेश नहीं है फिर भी यह रचना भारत के मध्य- कालीन इतिहास का झ्रनिवारयं अंग स्वीकार को जायेगी इसमें हमे संदेह नहीं है । ऐसे प्रकाशन से हम श्रपने संस्थान की गतिविधि श्रारम्भ कर रहे है इस कारण हमें बहुत प्रसन्चता है । न




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